Jharkhand Politics : झारखंड में पेसा कानून को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष आरती कुजूर ने झामुमो प्रवक्ताओं और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कैबिनेट में पेसा कानून से जुड़ा प्रस्ताव पारित हो चुका है, तो सरकार अब तक इसे सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है।
Jharkhand Politics : पेसा कानून आदिवासी समाज का संवैधानिक अधिकार है
आरती कुजूर ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज का संवैधानिक अधिकार है, न कि किसी सरकार की ओर से दिया गया त्योहारी तोहफा। उनका कहना था कि आदिवासी समाज का अस्तित्व किसी पर्व या सरकार से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराना है। ऐसे में पेसा को “उपहार” की तरह पेश करना आदिवासी अस्मिता के साथ अन्याय है।
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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कैबिनेट की बैठक को 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो निर्णय की आधिकारिक जानकारी साझा की गई है और न ही उससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। कुजूर के अनुसार, जब तक सरकार निर्णय को औपचारिक रूप से सामने नहीं लाती, तब तक केवल मीडिया में आई खबरों पर जनता और आदिवासी समाज भरोसा कैसे करे।
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Jharkhand Politics : न्यायालय के निर्देश और विपक्ष के दबाव में सरकार ने पेसा लागू किया
भाजपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार अपने छह साल के कार्यकाल में कई बार बहाने बनाती रही है और अब भी जिम्मेदारी से बच रही है। उनका आरोप है कि पेसा से जुड़ा प्रस्ताव सरकार ने अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि न्यायालय के निर्देश और विपक्ष के दबाव में लाया है।
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आरती कुजूर ने दावा किया कि भाजपा ने हमेशा आदिवासी हितों से जुड़े फैसलों को प्राथमिकता दी है और जनजातीय समाज यह बात भली-भांति जानता है। उन्होंने अंत में राज्य सरकार से मांग की कि पेसा कानून से जुड़े कैबिनेट के फैसले को बिना देरी सार्वजनिक किया जाए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।












