Kerosene Production: ऊर्जा संकट के बीच क्यों बढ़ा केरोसिन(Kerosene) का महत्व
Kerosene Production: दुनिया इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का सामना कर रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया है। ऐसे में एक पुराना ईंधन—केरोसिन(Kerosene)—एक बार फिर से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से वापसी कर रहा है।
कभी पुराना और कम उपयोग वाला माने जाने वाला यह ईंधन आज एलपीजी (LPG) की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरा है। आइए जानते हैं केरोसिन उत्पादन में कौन से देश सबसे आगे हैं और भारत की इसमें क्या भूमिका है।
Kerosene उत्पादन में जापान है नंबर-1
जब बात केरोसिन(Kerosene ) उत्पादन की आती है, तो जापान दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। वैश्विक स्तर पर Kerosene की आपूर्ति बनाए रखने में जापान की भूमिका सबसे अहम है:
- जापान दुनिया के कुल केरोसिन उत्पादन में 22% से अधिक का योगदान देता है।
- जापान में रोजाना 3 लाख बैरल से ज्यादा केरोसिन का उत्पादन होता है।
जापान के अलावा, दुनिया के अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में स्पेन, भारत, सऊदी अरब और कुवैत शामिल हैं। ये देश मिलकर वैश्विक बाजार के बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं।
क्यों बढ़ रही है Kerosene की मांग?
तेल और गैस के अंतरराष्ट्रीय संकट ने Kerosene की मांग को दोबारा हवा दी है। इसके मुख्य कारण हैं:
- रसोई गैस (LPG) की कीमतों में लगातार उछाल के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लिए केरोसिन एक सस्ता विकल्प बन गया है।
- युद्ध और तनाव के कारण गैस की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव आ रहा है, जिससे घरों और छोटे व्यवसायों ने रोशनी और खाना पकाने के लिए Kerosene को फिर से अपनाना शुरू कर दिया है।
- दुर्गम इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में केरोसिन आज भी ऊर्जा का एक विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।
भारत सरकार का बड़ा कदम: पेट्रोल पंपों पर मिलेगा Kerosene
ईंधन की संभावित कमी से निपटने और आम जनता को राहत देने के लिए भारत सरकार ने Kerosene के भंडारण और बिक्री के नियमों में ढील दी है।
- अब ग्रामीण और शहरी इलाकों के पेट्रोल पंपों को एक सीमित मात्रा में केरोसिन का स्टॉक रखने और उसे बेचने की अनुमति दी गई है।
- निर्धारित आउटलेट अब 5000 लीटर तक केरोसिन का भंडारण कर सकते हैं।
- इससे सप्लाई चेन में बाधा आने पर भी केरोसिन आम लोगों तक आसानी से पहुँच सकेगा।
Kerosene Production: निर्यात हब बनता भारत
भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अपनी रिफाइनिंग क्षमता का शानदार उपयोग भी कर रहा है। भारत वर्तमान में रूस से रियायती दर (Discounted Rate) पर कच्चा तेल खरीद रहा है और उसे रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में यूरोप जैसे क्षेत्रों में निर्यात कर रहा है। इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत का दबदबा भी बढ़ रहा है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में Kerosene का महत्व फिर से बढ़ गया है। जहां जापान उत्पादन में शीर्ष पर है, वहीं भारत जैसे देश अपनी रणनीतिक नीतियों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हैं।













