कोडरमा में जंगली हाथियों की घुसपैठ से हाहाकार: रात होते ही फसलों को रौंद रहा 25 हाथियों का कुनबा, बेबस ग्रामीण खुद खदेड़ने को मजबूर
कोडरमा (झारखंड):
झारखंड के कोडरमा जिले में जंगली हाथियों का खौफ अब केवल दूरदराज के देहातों तक सीमित नहीं रह गया है। ग्रामीण और जंगली इलाकों में कोहराम मचाने के बाद हाथियों का रुख अब शहरी क्षेत्रों की तरफ होने लगा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में गहरी दहशत है। रात होते ही सन्नाटे को चीरती चिंघाड़ और तबाही के खौफ से लोग रात-रात भर जागने को मजबूर हैं। अब तक हाथियों के हमलों में कई लोगों की असमय मौत भी हो चुकी है, जिसके कारण पूरा इलाका खौफ के साए में जी रहा है।
मरकच्चो के बेरहवा जंगल में जमाया डेरा, 3 गांवों में मचाई भारी तबाही
ताजा संकट मरकच्चो प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बेरहवा जंगल से सामने आया है। वन विभाग और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में करीब 25 हाथियों का एक बड़ा झुंड इस जंगल को अपना नया ठिकाना बनाए हुए है। यह झुंड बेहद शातिर तरीके से दिन के वक्त घने जंगलों में छिपा रहता है और रात का अंधेरा होते ही रिहायशी इलाकों का रुख कर लेता है।
बीती रात इस बेकाबू झुंड ने बेरहवा जंगल की सीमा से सटे कई गांवों पर धावा बोल दिया। विशेष रूप से नादकरी, महुआटांड और हरलाडीह गांवों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान खेतों में लगी धान की फसलों और तैयार किए गए बिचड़ों (बिहन) को हाथियों ने पैरों तले बेरहमी से रौंद दिया।
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कड़ी मशक्कत के बाद मशाल और पटाखों से खदेड़ा
फसलें नष्ट होते देख किसानों और ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चा संभाला। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीकों का सहारा लेते हुए जलती हुई मशालें (लूप) जलाईं और तेज आवाज वाले पटाखे फोड़कर काफी जद्दोजहद के बाद हाथियों को पास के ही एक दूसरे जंगल की तरफ खदेड़ दिया। हालांकि, खतरा अभी टला नहीं है। ग्रामीणों के मन में यह डर लगातार बना हुआ है कि हाथियों का यह हिंसक झुंड किसी भी वक्त दोबारा गांव का रुख कर सकता है।
प्रभावित किसानों ने भारी मन से बताया कि इस साल मानसून की बेरुखी और कम बारिश के बावजूद उन्होंने बेहद कठिन परिश्रम और भारी लागत से धान की नर्सरी (बिहन) तैयार की थी। हाथियों द्वारा इसे नष्ट किए जाने से उनके सामने आर्थिक तबाही का संकट खड़ा हो गया है। परेशान किसानों ने अब जिला प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है और हाथियों के इस स्थायी आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
“जंगल कट रहे हैं, इसलिए रिहायशी इलाकों में आ रहे हाथी” – भड़कीं विधायक नीरा यादव
इस गंभीर संकट पर कोडरमा की स्थानीय विधायक डॉ. नीरा यादव ने गहरी चिंता और आक्रोश जताया है। मामले को बेहद गंभीर बताते हुए उन्होंने सरकार से ग्रामीणों के जान-माल की रक्षा के लिए फौरन कड़े कदम उठाने की मांग की।
विधायक डॉ. यादव ने वन विभाग की सुस्त कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा:
“वन विभाग पूरी तरह निष्क्रिय और मूकदर्शक बना हुआ है। एक तरफ जहां जंगलों की अवैध और अंधाधुंध कटाई बेधड़क जारी है, वहीं वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास खत्म होते जा रहे हैं। जब हाथियों के पास जंगल में रहने और खाने का जरिया नहीं बचेगा, तो वे रिहायशी इलाकों की तरफ ही भागेंगे। अगर सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी भयावह रूप अख्तियार कर लेगा।”
मिट्टी के कच्चे घर बढ़ा रहे हैं ग्रामीणों की जान का जोखिम: डीएफओ
दूसरी ओर, मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए कोडरमा के वन प्रमंडल अधिकारी (डीएफओ) सौमित्र शुक्ला ने बताया कि कोडरमा भौगोलिक रूप से चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा हुआ क्षेत्र है। ऐसे में जंगलों के मुहाने और उससे सटे इलाकों में रहने वाले ग्रामीण सबसे ज्यादा संवेदनशील और खतरे के दायरे में हैं।
डीएफओ के अनुसार, संकट इसलिए भी ज्यादा बड़ा है क्योंकि क्षेत्र में आज भी बड़ी आबादी मिट्टी और कच्चे मकानों में निवास करती है। हाथियों के अचानक होने वाले हमलों की स्थिति में इन कच्चे मकानों के ढहने से ग्रामीणों की जान पर सीधा और बेहद गंभीर खतरा हमेशा मंडराता रहता है। विभाग स्थिति पर नजर रखने और सुरक्षात्मक उपाय तलाशने की कोशिश कर रहा है।







