झारखंड के महागामा को जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिख रही है। सात साल पहले अनुमंडल का दर्जा मिलने के बाद यहां के लोगों को प्रशासनिक राहत जरूर मिली, लेकिन अब स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधि इसे पूर्ण जिला बनाने की दिशा में तेजी से प्रयास कर रहे हैं।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की प्राथमिकता में सबसे ऊपर
दीपिका पांडेय सिंह ने स्पष्ट किया है कि महागामा को जिला घोषित कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए इस दिशा में सकारात्मक परिणाम जल्द सामने आएंगे।
65 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय, लोगों को होती थी परेशानी
अनुमंडल बनने से पहले महागामा और आसपास के इलाकों के लोगों को छोटे-बड़े कामों के लिए गोड्डा जिला मुख्यालय तक लगभग 65 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।
खासकर ठाकुरगंगटी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।
हालांकि अनुमंडल बनने के बाद कई सरकारी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिलने लगीं, जिससे समय और खर्च दोनों में कमी आई है।
चुनावी वादा, अब फिर दोहराया गया
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दीपिका पांडेय सिंह ने महागामा को जिला बनाने का वादा किया था। इसके साथ ही उन्होंने
- हनवारा और बलबड्डा को प्रखंड
- ठाकुरगंगटी को अनुमंडल
बनाने की बात भी कही थी।
अब उन्होंने बताया कि हनवारा और बलबड्डा को प्रखंड बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती
नगर पंचायत बनने के बावजूद महागामा में अब भी कई मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं।
सबसे बड़ी समस्या स्थायी बस स्टैंड का अभाव है।
बसुआ चौक और मुख्य बाजार में वाहनों के अनियमित ठहराव के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
फिलहाल गोचर भूमि को अस्थायी बस स्टैंड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां
- पार्किंग की व्यवस्था नहीं
- पेयजल की सुविधा नहीं
- शौचालय का अभाव
जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
बस स्टैंड निर्माण पर तेज हुआ काम
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद प्रसाद अग्रवाल के अनुसार, बस स्टैंड निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
भूमि चयन, डिजाइन और अन्य प्रक्रियाओं पर तेजी से काम चल रहा है। जल्द ही यहां
- आधुनिक बस स्टैंड
- पेयजल सुविधा
- शौचालय
- पार्किंग व्यवस्था
उपलब्ध कराई जाएगी।
विकास से मिलेगी जिला मांग को नई ताकत
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास होता है, तो महागामा की छवि और मजबूत होगी। इससे जिला बनाने की मांग को भी नई गति मिलेगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी वादे कब जमीन पर उतरते हैं और महागामा को जिला बनाने का सपना आखिर कब साकार होता है।












