मंगलवार को सऊदी अरब में एक अचानक तनाव फैल गया। मक्का, जेद्दा और ताइफ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में संभावित हवाई खतरे के कारण नागरिक सुरक्षा विभाग ने आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया। खास बात यह रही कि मक्का में ऐसा अलर्ट पहली बार देखने को मिला। हालांकि, जल्द ही अलर्ट वापस ले लिया गया और खतरा टल गया। लेकिन यह घटना लोगों की चिंता बढ़ा गई।
मक्का दुनिया भर के मुसलमानों के लिए पवित्र शहर है। ऐसे में यहां हवाई हमले की चेतावनी सामने आना बड़ी बात मानी जा रही है। अलर्ट के दौरान लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए कुछ खास बातें ध्यान में रखने की सलाह दी गई।
अचानक आया अलर्ट, फिर कुछ देर में हटाया गया
जब सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने अलर्ट जारी किया तो मक्का, जेद्दा और ताइफ़ में लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं।
हालांकि, जल्द ही अधिकारियों ने बताया कि खतरा खत्म हो गया है। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। मक्का के आसपास ड्रोन को इंटरसेप्ट किए जाने की खबरें भी सामने आईं। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है।
पहले भी सऊदी के कई इलाकों को बनाया गया निशाना
यह पहली बार नहीं है जब सऊदी को ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा है। पहले भी जाज़ान, अभा, खमीस मुशैत और नज़रान जैसे इलाकों में हमले हो चुके हैं।
इन हमलों में नागरिक घायल हुए और इमारतों को नुकसान हुआ। इस्लामिक सहयोग संगठन, यानी OIC ने भी सऊदी में हुए हमलों की निंदा की और नागरिकों और महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा के लिए चिंता जताई।
तेल पाइपलाइन पर हमले से बढ़ी परेशानी
सऊदी के लिए सबसे बड़ी चिंता सिर्फ शहरों तक हमले नहीं हैं। देश की तेल व्यवस्था भी इस तनाव की चपेट में आई है।
ड्रोन हमले के बाद सऊदी की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन देश के तेल को लाल सागर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।अगर इस तरह के हमले लंबे समय तक जारी रहें तो इसका असर सिर्फ सऊदी तक ही सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
लाल सागर में भी बढ़ रहा तनाव
दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने लाल सागर में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। बाब-अल-मंदेब जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आवाजाही पर पड़ सकता है। मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप के बारे में भी सैन्य गतिविधियों की खबरें आई हैं। इसीलिए अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
क्या अब बड़ा सैन्य जवाब देगा सऊदी?
लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सऊदी अब हूतियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू करेगा? अभी तक सऊदी अरब की ओर से किसी बड़े सैन्य पलटवार की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व दूसरे अरब देशों के साथ बातचीत और सुरक्षा सहयोग पर जोर दे रहा है।
अब तक मक्का, जेद्दा और ताइफ़ में जारी किया गया आपातकालीन अलर्ट वापस ले लिया गया है। लेकिन जिस तरह से मक्का तक हवाई खतरे की चेतावनी पहुंची है, उसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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