National News: असम के चर्चित गायक जुबिन गर्ग की संदिग्ध मौत ने जहां पूरे राज्य को झकझोर दिया है, वहीं इस मामले से जुड़े पहलुओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। इसी बीच सिंगापुर-स्थित इवेंट मैनेजर श्यामकानु महंत पर संगठित वित्तीय अपराध, फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
श्यामकानु महंत पूर्व डीजीपी भास्कर ज्योति महंत के छोटे भाई हैं, जो वर्तमान में असम राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त हैं। उनके बड़े भाई नानी गोपाल महंत गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं और इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के शिक्षा सलाहकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।
CID की छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
गुरुवार और शुक्रवार को CID ने श्यामकानु महंत के घर और दफ्तर पर छापेमारी की। इस दौरान जांच टीम को कई हैरान करने वाले दस्तावेज मिले, जिनमें शामिल हैं:
– एक ही कंपनी के नाम पर बनाए गए कई पैन कार्ड
– करीब 30 सरकारी विभागों और कंपनियों की जाली मुहरें
– बेनामी संपत्तियों से जुड़े कागजात
– पीएमजीएसवाई योजना के तहत सड़कों के निर्माण से जुड़े दस्तावेज
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FIR में क्या लिखा गया?
तलाशी के बाद CID के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशिफ अहमद ने एक विस्तृत FIR दर्ज की है। FIR में कहा गया है कि, बड़ी संख्या में जाली पैन कार्ड और मुहरें एक संगठित वित्तीय षड्यंत्र की ओर इशारा करती हैं। बरामद दस्तावेज दर्शाते हैं कि सरकारी परियोजनाओं और संपत्तियों से जुड़े लेन-देन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। मामले की गहराई से जांच कर महंत की संपत्तियों, बैंक खातों और संदिग्ध ट्रांजैक्शंस को ज़ब्त करने की मांग की गई है।
SIT और आगे की कार्रवाई
पहले ही DGP हरमीत सिंह ने जुबिन गर्ग की मौत की जांच के लिए 9 सदस्यीय SIT का गठन किया है। अब इस नए वित्तीय घोटाले को लेकर CID बैंक खातों की जांच, बेनामी संपत्तियों की जब्ती और संदिग्ध लेन-देन का ऑडिट कर रही है।
यह मामला केवल जुबिन गर्ग की रहस्यमयी मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि असम की राजनीति और प्रशासन के बीच गहरे फर्जीवाड़े और संगठित अपराध के नेटवर्क की शक्ल भी उजागर करता दिखाई दे रहा है।













