बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया है।
इस्तीफे के कुछ ही देर बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और विपक्ष के कई नेताओं ने इसे राजनीतिक रणनीति करार देते हुए सवाल उठाए।
रोहिणी आचार्य का तंज—‘ऑपरेशन फिनिश नीतीश’
राजद सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav की बेटी Rohini Acharya ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सुनियोजित तरीके से उन्हें बिहार की राजनीति से बाहर करने की रणनीति बनाई है।
रोहिणी ने इसे ‘ऑपरेशन फिनिश नीतीश’ बताते हुए लिखा कि भाजपा ने मजबूरन उनसे इस्तीफा दिलवाया। साथ ही उन्होंने कहावत का जिक्र करते हुए कहा—“जैसा बोया, वैसा पाया।”
तेजस्वी और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav, Shakti Singh Yadav समेत कई नेताओं ने भी इस मुद्दे पर भाजपा और जदयू पर निशाना साधा। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक दबाव और सत्ता समीकरण का हिस्सा है।
राज्यसभा की ओर बढ़ते कदम
नीतीश कुमार का यह इस्तीफा उनके अगले राजनीतिक पड़ाव की ओर संकेत करता है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही राज्यसभा के लिए नामांकन कर सकते हैं। यह कदम उनके लंबे राजनीतिक सफर के नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।
नीतीश की सियासी यात्रा का अहम मोड़
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का यह फैसला उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक उनकी सक्रियता अब नए रूप में देखने को मिल सकती है।
निशांत कुमार की एंट्री पर भी चर्चा
इसी बीच उनके बेटे निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, हालांकि उनके अनुभव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव जदयू के भविष्य और बिहार की राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है।
नीतीश कुमार का MLC पद से इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उनका अगला कदम क्या होगा और इसका राज्य के सत्ता समीकरण पर क्या असर पड़ेगा।













