KhabarMantra: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से एक अहम संवैधानिक मुद्दे पर राय मांगी है। उन्होंने राज्यपालों और राष्ट्रपति द्वारा राज्य विधानसभाओं से पारित विधेयकों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर सर्वोच्च न्यायालय से 14 महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं।
राष्ट्रपति ने यह सवाल सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले के संदर्भ में उठाए हैं, जिसमें अदालत ने तमिलनाडु के राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए राज्य विधेयकों पर निर्णय लेने की एक निर्धारित समयसीमा तय की थी। इस फैसले पर अब कार्यपालिका और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी असहमति जताई है, जिसे ‘सीमाओं से परे हस्तक्षेप’ बताया गया।
राष्ट्रपति के मुख्य सवाल:
राष्ट्रपति मुर्मू ने पूछा है –
- क्या सुप्रीम कोर्ट के पास यह अधिकार है कि वह राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयकों पर निर्णय लेने की डेडलाइन तय कर सके?
- जब संविधान में स्पष्ट समयसीमा का उल्लेख नहीं है, तो क्या न्यायपालिका को यह अधिकार प्राप्त है कि वह इस प्रक्रिया में समय निर्धारण कर सके?
यह रहे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से पूछे गए संभावित 14 सवालों का विश्लेषणात्मक और अनुमानित प्रारूप। ये सवाल राज्यपाल और राष्ट्रपति के विधायी अधिकारों, प्रक्रियाओं और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं से जुड़े हैं:
संविधान पीठ का गठन जरूरी
अब नए मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई, जो हाल ही में भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ले चुके हैं, को इन सवालों के जवाब के लिए एक संविधान पीठ का गठन करना होगा। इस पीठ में कम से कम पांच न्यायाधीश शामिल होंगे, जो इन सवालों की संवैधानिक व्याख्या करेंगे।
क्या है अनुच्छेद 143(1)?
अनुच्छेद 143(1) के तहत, राष्ट्रपति भारत के सुप्रीम कोर्ट से किसी भी ऐसे विधिक प्रश्न पर सलाह मांग सकते हैं जो सार्वजनिक महत्व का हो और जिस पर उनकी राय आवश्यक हो। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को अपनी राय देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि वह देता है, तो उसका प्रभाव गंभीर और दूरगामी हो सकता है।
राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए ये सवाल न सिर्फ कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकारों की सीमाओं को स्पष्ट करने की दिशा में एक कदम हैं, बल्कि इससे यह भी तय होगा कि संविधान में निहित शक्तियों की व्याख्या किस प्रकार की जा सकती है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस दिशा में एक नजीर बन सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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