रांची: राजधानी रांची में भाजपा कार्यालय घेराव के दौरान हुई हिंसक झड़प अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों की ओर से हरमू थाना में अलग-अलग प्राथमिकी (Cross FIR) दर्ज कराई गई है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने, मारपीट, पथराव और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा की FIR में क्या आरोप हैं?
भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस समर्थकों ने प्रदर्शन के दौरान अचानक उग्र होकर भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की। FIR के अनुसार पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया गया तथा भाजपा कार्यालय और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया।
भाजपा का दावा है कि इस दौरान कई कार्यकर्ता घायल हुए। FIR में बड़ी संख्या में नामजद और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में मारपीट, तोड़फोड़, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस की FIR में क्या कहा गया?
दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से दर्ज प्राथमिकी में भाजपा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार प्रदर्शन के दौरान भाजपा समर्थकों ने कथित रूप से कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल हो गए।
FIR में यह भी कहा गया है कि झड़प के दौरान मारपीट और पथराव हुआ तथा कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। शिकायत के साथ घायलों के मेडिकल दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में एक घायल का हरमू अस्पताल का मेडिकल रिकॉर्ड भी शामिल है, जिसमें सिर एवं शरीर पर चोट का उल्लेख दिखाई देता है।
पुलिस दोनों FIR की कर रही जांच
दोनों पक्षों की शिकायत मिलने के बाद हरमू थाना पुलिस ने अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल के CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा ने इसे सुनियोजित हमला बताया है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनके कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
Cross FIR दर्ज होने के बाद यह मामला अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी जांच का विषय भी बन गया है। पुलिस की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्य यह तय करेंगे कि घटना के लिए जिम्मेदार कौन था।








