Ranchi: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। विद्यार्थी जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित टूल्स के साथ सीखने के नए तरीके अपना रहे हैं, वहीं शिक्षकों को भी इस बदलती तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसी दिशा में रांची विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षकों को AI और आधुनिक शिक्षण तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
AI के साथ बदल रहा है शिक्षण का तरीका
रांची विश्वविद्यालय में NCERT नई दिल्ली और केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET) के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को बताया जा रहा है कि तकनीक का उपयोग केवल ऑनलाइन क्लास या डिजिटल कंटेंट तक सीमित नहीं है। AI की मदद से विद्यार्थियों की जरूरत और सीखने की क्षमता के अनुसार पाठ्य सामग्री तैयार करने, विषयों को आसान तरीके से समझाने और कक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने शिक्षकों को AI के व्यावहारिक इस्तेमाल से भी अवगत कराया। उनका कहना है कि मौजूदा दौर में विद्यार्थियों को तकनीक से अलग रखकर शिक्षा देना संभव नहीं है। इसलिए शिक्षकों के लिए भी AI की कार्यप्रणाली और इसके जिम्मेदार इस्तेमाल को समझना जरूरी हो गया है।
Gen Z के साथ कदम मिलाना शिक्षकों के लिए जरूरी
कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों ने भी माना कि विद्यार्थियों की सीखने की शैली तेजी से बदल रही है। आज की पीढ़ी डिजिटल तकनीक और नए AI टूल्स से काफी परिचित है। ऐसे में शिक्षकों को भी अपनी शिक्षण पद्धति में बदलाव लाना होगा।
एक शिक्षिका ने कहा कि आज के बच्चे Gen Z के दौर के हैं। इसलिए शिक्षकों को भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए AI और आधुनिक तकनीक की जानकारी हासिल करनी होगी। शिक्षकों का मानना है कि तकनीक का सही इस्तेमाल कक्षा को अधिक संवादात्मक और प्रभावी बना सकता है।
Ranchi University में Prompt Engineering से लेकर LMS तक की ट्रेनिंग
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षा और तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से AI-Integrated Experiential Learning, Prompt Engineering, Learning Management System (LMS), Instructional Design, Media Research और ICT Tools शामिल हैं।
विशेषज्ञ शिक्षकों को यह समझा रहे हैं कि AI की सहायता से ई-कंटेंट तैयार करने, शिक्षण सामग्री को व्यवस्थित करने, विद्यार्थियों की सीखने की जरूरतों को पहचानने और पढ़ाने के तरीके को अधिक प्रभावी बनाने में तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा को बनाने की कोशिश
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शिक्षकों को नए AI टूल्स की जानकारी देना नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा में तकनीकी दक्षता और शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर करना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को अधिक तकनीक-सक्षम और विद्यार्थी केंद्रित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक इस तरह के प्रशिक्षण से जुड़ रहे हैं। इससे तकनीक आधारित शिक्षण का दायरा किसी एक संस्थान तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग विश्वविद्यालयों और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।
AI शिक्षा का विकल्प नहीं, बेहतर शिक्षा का माध्यम
रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा ने भी तकनीक को विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, रचनात्मकता और सहभागिता बढ़ाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया है।
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम से एक बात स्पष्ट है कि आने वाले समय में AI शिक्षा की जगह लेने के बजाय शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी उपकरण की भूमिका निभा सकता है। हालांकि इसके साथ सबसे बड़ी जिम्मेदारी इसके सही इस्तेमाल की होगी।
शिक्षकों के सामने नई चुनौती
अब शिक्षकों के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI को कैसे इस्तेमाल किया जाए, बल्कि यह भी है कि किस विषय में, कितनी सीमा तक और किस उद्देश्य से AI का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। शिक्षा में तकनीक का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब AI का उपयोग शिक्षक की भूमिका को खत्म करने के बजाय उसे और प्रभावी बनाने के लिए किया जाए।
रांची विश्वविद्यालय में चल रहा यह प्रशिक्षण इसी बदलाव की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में AI, डिजिटल कंटेंट और पारंपरिक शिक्षण पद्धति का बेहतर तालमेल उच्च शिक्षा के स्वरूप को काफी हद तक बदल सकता है।
ये भी पढ़ें: Vastu Rules: जूते-चप्पल रखने की ये गलती पड़ सकती है भारी! जानें वास्तु के नियम
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।












