National news: भारत के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), ने अपने हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) के तहत एक बड़ा कदम उठाया है. RBI ने एकमुश्त 50 आधार अंकों (0.50%) की कटौती की घोषणा की है, जिससे REPO RATE अब 5.50% हो गया है. यह कटौती न केवल लोन दरों में कमी लाएगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि इस कटौती से बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.50 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध होगी, जिसे बैंकों द्वारा कर्ज वितरण में इस्तेमाल किया जाएगा. यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को और तेज गति से आगे बढ़ाने में सहायक होगा.
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क्या होगा असर?
इस कटौती से होम लोन, आटो लोन, पर्सनल लोन और अन्य बैंकिंग कर्ज की दरों में तेजी से कमी देखने को मिल सकती है. हालांकि, पहले हुए REPO RATE में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं मिला था, लेकिन इस बार उम्मीद है कि बैंकों से ज्यादा सस्ता कर्ज मिलेगा.
REPO RATE क्या होता है?
REPO RATE वह दर है जिस पर वाणिज्यक बैंक RBI से अल्पकालिक फंड उधार लेते हैं. जब आरबीआई रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है, जिससे ग्राहकों को भी सस्ती दरों पर कर्ज मिलता है.
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कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में भी कटौती
इसके साथ ही आरबीआई ने CRR में 100 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 4% से घटाकर 3% कर दिया है. इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर में और अधिक लिक्विडिटी आएगी और बैंक अपने कर्ज वितरण में तेजी ला सकेंगे. इस कदम का असर बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर भी देखा गया है, जहां बैंक निफ्टी ने 56,000 का स्तर पार किया.
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में तेजी
CRR में कटौती के बाद बैंक, फाइनेंशियल और एनबीएफसी शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है. IDFC First Bank, Axis Bank और PNB के शेयरों में 2% तक की वृद्धि देखने को मिली, जबकि श्रीराम फाइनेंस, Bajaj Finance और REC जैसी कंपनियों के शेयरों में 3% तक का उछाल आया है.
आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, और महंगाई दर में भी राहत मिल सकती है. आरबीआई ने अनुमान जताया है कि 2025-26 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% रह सकती है, जो देश को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा.













