रांची/जमशेदपुर: झारखंड में सिंचाई व्यवस्था को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना की चांडिल बाँयी मुख्य नहर और उसकी वितरण प्रणाली की बदहाल स्थिति को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार उद्योगों से करोड़ों रुपये का राजस्व तो वसूल रही है, लेकिन किसानों को सिंचाई की मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है।
सरयू राय ने कहा कि करीब 128 किलोमीटर लंबी चांडिल बाँयी मुख्य नहर का निर्माण लगभग 30 वर्ष पहले हुआ था। इसके बाद से नहर और उसकी वितरण प्रणाली की समुचित मरम्मत और रखरखाव नहीं किया गया। लगातार उपेक्षा के कारण नहर की सिंचाई क्षमता घटती जा रही है, जिससे हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं।
80 प्रतिशत नहर झाड़ियों और गाद से पटी
विधायक के अनुसार नहर के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से में झाड़ियां उग चुकी हैं और बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा हो गई है। कई स्थानों पर तटबंध भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो खरीफ सीजन में किसानों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
‘उद्योगों को पानी, किसानों को इंतजार’
सरयू राय ने आरोप लगाया कि स्वर्णरेखा परियोजना का पानी बड़े उद्योगों को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सरकार को हर साल भारी राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने दावा किया कि केवल टाटा स्टील से ही सरकार को सालाना 700 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलता है, लेकिन इस राशि का उपयोग नहरों के रखरखाव और किसानों की सिंचाई व्यवस्था सुधारने में नहीं किया जा रहा। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया।
कमजोर मानसून की आशंका के बीच बढ़ी चिंता
अपने पत्र मेंSaryu Roy ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों की निर्भरता स्वर्णरेखा परियोजना की सिंचाई व्यवस्था पर और अधिक बढ़ जाएगी। इसलिए सरकार को बिना देरी किए नहरों की मरम्मत का काम शुरू करना चाहिए।
2026-27 बजट में विशेष प्रावधान की मांग
विधायक ने मांग की है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में चांडिल बाँयी मुख्य नहर की पूरी 128 किलोमीटर लंबाई और उसकी वितरण प्रणाली के मरम्मत एवं रखरखाव के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया जाए। उनका कहना है कि इससे खरीफ और रबी दोनों फसलों के दौरान किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
सरयू राय ने कहा कि यदि उद्योगों से मिलने वाले करोड़ों रुपये के बावजूद किसानों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, तो यह राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।







