Ranchi: JSSC-CGL भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार अब पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित बता रही है, तो पहले अदालत के सामने क्या तथ्य रखे गए थे और उनकी जिम्मेदारी किसकी थी।
कई अफसरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए
मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि सरकार के हालिया हलफनामे के बाद सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले की जांच और अब अदालत में रखे गए पक्ष के बीच अंतर क्यों है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को पहले दूसरी दिशा में ले जाने और परीक्षा में गड़बड़ी नहीं होने का दावा करने के पीछे किसकी भूमिका थी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार को मामले की जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कथित भर्ती गड़बड़ी को केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पूरे मामले की CBI से स्वतंत्र जांच कराने की मांग
मरांडी ने JSSC और JPSC जैसी भर्ती संस्थाओं की साख का हवाला देते हुए पूरे मामले की CBI से स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को JSSC से हटाने तथा मनोज कौशिक को CID ADG के पद से हटाने की मांग की।
यह मामला फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है। 18 सितंबर की सुनवाई में राज्य सरकार ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया। सरकार ने अदालत में कहा कि JSSC-CGL की पूरी परीक्षा प्रक्रिया कथित अनियमितताओं से प्रभावित थी और इसी आधार पर परीक्षा रद्द करना जरूरी बताया।
हाईकोर्ट ने नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश पर पहले से लगी अंतरिम रोक जारी रखी है। अदालत ने जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को मॉनिटर नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।

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