Ranchi: राजधानी दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों और वित्त सचिवों की दो दिवसीय बैठक हुई। ‘विकसित भारत’ की वित्तीय जरूरतों पर आयोजित इस सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य का पक्ष रखा। बैठक में केंद्र-राज्य वित्तीय समन्वय, कृषि, ऊर्जा और GST से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
पिछड़े राज्यों को आर्थिक सहयोग दिए बिना विकसित भारत का लक्ष्य मुश्किल
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लक्ष्य के लिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनके अनुसार, पिछड़े राज्यों को पर्याप्त आर्थिक सहयोग दिए बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा।
उन्होंने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। किशोर के मुताबिक देश की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई, कृषि से जुड़े क्षेत्रों, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जरूरी हैं।
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केंद्र से राज्य के वित्तीय हितों की सुरक्षा की मांग
वित्त मंत्री ने झारखंड को केंद्र की नीतियों से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने GST के कर युक्तिकरण, संशोधित ग्रामीण रोजगार योजना और MMDR कानून में बदलाव से राज्य को हजारों करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का दावा किया। इन दावों को लेकर उन्होंने केंद्र से राज्य के वित्तीय हितों की सुरक्षा की मांग की।
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उन्होंने कहा कि MMDR कानून में बदलाव से झारखंड के खनिज राजस्व और लंबित बकाया राशि से जुड़े अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इससे पहले भी किशोर इस मुद्दे पर राज्य के संभावित राजस्व नुकसान की बात कह चुके हैं।
झारखंड की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं
बैठक में झारखंड की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें खनन पर सेस लगाने के अधिकार को बहाल करना, GST युक्तिकरण से होने वाली क्षति की भरपाई और ग्रामीण रोजगार योजना में केंद्र-राज्य हिस्सेदारी को 90:10 करने की मांग शामिल है।
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झारखंड सरकार का कहना है कि खनिज संपदा से समृद्ध राज्य को पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलने पर वह देश के विकास लक्ष्य में अधिक प्रभावी योगदान दे सकता है।

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