Bihar News– बिहार की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मच गई है. एक तरफ दानापुर की पूर्व विधायक आशा सिन्हा की जमानत रद्द करते हुए कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है, तो दूसरी ओर बीजेपी के फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज हुआ है. दोनों नेताओं पर अलग-अलग मामलों में कानूनी शिकंजा कसता नज़र आ रहा है.
पूर्व विधायक आशा सिन्हा की गिरफ्तारी का आदेश!
पटना की एक विशेष अदालत ने पूर्व विधायक आशा सिन्हा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन किया और सरकारी आदेश की अवहेलना करते हुए वाहन जुलूस निकाला. वहीं, लगातार कोर्ट में अनुपस्थित रहने के चलते उनकी जमानत रद्द कर दी गई. कोर्ट ने उन्हें 13 मई 2025 को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया था, लेकिन वे पेश नहीं हुईं. इसी कारण मंगलवार को उनकी जमानत खारिज कर गिरफ्तारी का फरमान जारी कर दिया गया.
BJP नेता अश्विनी चौबे पर कोर्ट में मुकदमा दर्ज
दूसरी ओर रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा मां जानकी की प्रतिमा को लेकर हुए विवाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, संस्थापक कुमार सुशांत और बब्बन सिंह पर स्थानीय निवासी राजीव कुमार ने मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि बखरी मंदिर निर्माण को लेकर पुनौरा मंदिर की तस्वीरों का भ्रामक उपयोग किया गया. यह मामला स्थानीय सिविल कोर्ट में दर्ज हुआ है.
बिहार की राजनीति में कानूनी तूफान!
इन दोनों मामलों ने बिहार के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है. जहां एक ओर कोर्ट ने पूर्व विधायक की गिरफ्तारी का आदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर एक कद्दावर भाजपा नेता को अदालत के कटघरे में खड़ा कर दिया गया है.
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