रांची: झारखंड में DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि अदालत अपना फैसला करेगी, लेकिन DGP के पास अपनी वर्दी, पद और सेवा-जीवन की गरिमा को लेकर फैसला लेने का विकल्प अभी भी है।
DGP की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के साथ झारखंड सरकार की 2025 की DGP नियुक्ति नियमावली और उसके एक प्रावधान में किए गए बदलाव को भी चुनौती दी गई है।
‘इस्तीफा देकर अपनी और झारखंड की लाज बचाइए’
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में तदाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार करने के बजाय खुद इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि DGP नियुक्ति मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से रखे गए पक्ष और अदालत के सवालों को जनता देख रही है। मरांडी के मुताबिक, अदालत ने DGP नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुपालन और राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के कानूनी आधार पर सवाल किए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि DGP नियुक्ति के लिए नियम बनाने का कानूनी आधार क्या है।
सरकार के नियमों पर भी उठाए सवाल
मामले में मुख्य कानूनी मुद्दों में झारखंड सरकार की 2025 की DGP नियुक्ति नियमावली भी शामिल है। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने नियमों में किए गए संशोधन का बचाव किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने कहा था कि नियम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाए गए हैं और तदाशा मिश्रा को अवसर देने के लिए संबंधित प्रावधान में बदलाव किया गया।
वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष और Amicus Curiae की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया तथा नियमों को लेकर आपत्तियां उठाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में इन मुद्दों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
‘कुर्सी कुछ दिनों की, बदनामी स्थायी’
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में पूर्व DGP अनुराग गुप्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने तदाशा मिश्रा से कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी फैसले के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
उन्होंने लिखा कि “कुर्सी कुछ दिनों की होती है, लेकिन बदनामी स्थायी” और दावा किया कि अभी भी समय है कि वह खुद इस्तीफा देकर अपनी और झारखंड की प्रतिष्ठा बचाने का निर्णय लें।
पुलिस व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना
मरांडी ने अपने बयान में झारखंड की पुलिस व्यवस्था और मुख्यमंत्री आवास से कथित तौर पर प्रभाव डालने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस व्यवस्था की वास्तविक कमान एक ऐसे व्यक्ति के हाथ में होने की चर्चा है, जो पहले सिपाही था और बाद में ASI बना।
हालांकि, इस संबंध में उन्होंने कोई सार्वजनिक दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है। इसलिए इस दावे को फिलहाल बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
DGP नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है और नियुक्ति तथा राज्य की नियमावली की वैधता पर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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