West Bengal: जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। घटना के बाद चिचुड़िया ग्राम पंचायत के चिचुड़िया मौजा में तनाव फैल गया। ग्रामीणों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए केंदा फाड़ी की पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा। फिलहाल पुलिस ने एहतियात के तौर पर अगले दो दिनों तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि डोबराना गांव के निवासी श्रीमंत ठाकुर उर्फ बापी ठाकुर द्वारा चिचुड़िया मौजा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर पक्का निर्माण शुरू कर दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन लंबे समय से सरकारी रिकॉर्ड में है और गांव के आम इस्तेमाल की है। इस संबंध में उन्होंने कई बार बीएलआरओ ऑफिस और पंचायत सहित विभिन्न सरकारी विभागों में लिखित शिकायत भी दी थी।
ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद
शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुकने पर शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर मौके पर पहुंच गए और काम रोकने की मांग करने लगे। इसी दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
वहीं जिन पर आरोप लगाया गया है, उन बापी ठाकुर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि उन्होंने किसी भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। निर्माण उनकी अपनी निजी और रैयती जमीन पर ही नियमानुसार हो रहा है। अपने दावे को सही ठहराने के लिए उन्होंने कोर्ट का एक दस्तावेज भी मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और उन्हें बदनाम करने की नीयत से लगाए जा रहे हैं।
पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया
तनाव बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने जामुड़िया थाने की केंदा फाड़ी को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया।
पुलिस की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी है कि अगले दो दिनों तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होगा। इस दौरान सरकारी अमीन और लैंड एंड लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों को बुलाकर जमीन की नए सिरे से पैमाइश कराई जाएगी। सरकारी नक्शा, आरएस और एलआर रिकॉर्ड से मिलान करने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि विवादित हिस्सा सरकारी है या निजी और यदि निजी है तो उसका वास्तविक रकबा कितना है।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पैमाइश रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।

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