Jharkhand: झरिया कोलफील्ड के बांसजोड़ा कोलियरी क्षेत्र के 12 नंबर में बुधवार को झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (JREDA) की टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान प्रस्तावित पुनर्वास योजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और बेलगड़िया की बजाय तेतुलमारी या मोहलीडीह में पुनर्वास की मांग की। निरीक्षण का नेतृत्व बीसीसीएल के खनन प्रबंधक रमेश महतो ने किया।
पुनर्वास के साथ रोजगार की मांग
निरीक्षण के दौरान रमेश महतो ने ग्रामीणों को झरिया मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित पुनर्वास योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जमीनविहीन लोगों को 80 वर्गफुट का मकान और ₹2.5 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं जिन परिवारों को मकान उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा, उन्हें ₹5 लाख की एकमुश्त राशि देकर पुनर्वासित किया जाएगा।
पहले चरण में बांसजोड़ा 12 नंबर के 77 परिवारों को बेलगड़िया में पुनर्वासित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस प्रस्ताव का स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने विरोध किया।
ग्रामीणों की मांग: रोजगार के नजदीक पुनर्वास
स्थानीय प्रतिनिधियों राम रहीम राजकुमार महतो और असलम मंसूरी ने कहा कि बेलगड़िया रोजगार की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। अधिकांश लोग तेतुलमारी, मोहलीडीह या निचितपुर जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं और इन्हीं इलाकों में पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
राम रहीम ने कहा, “केवल पुनर्वास से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक विस्थापित परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक यह योजना अधूरी है।”
पुनर्वास योजना पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों की आपत्तियों के बाद झरिया मास्टर प्लान की पुनर्वास योजना की जमीनी सच्चाई सामने आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को रोजगार और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
निरीक्षण में ये अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण दल में रमेश महतो के अलावा जरेड़ा के मन्नू शर्मा, एम.आई. हक, देवेंद्र कुमार, सिजुआ एरिया के अशोक कुमार और कांग्रेस नेता डब्लू पासवान भी शामिल थे।












