कोर्ट ने 30 सितंबर तक लगाई रोक
बुधवार को मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिंद्य लाहिड़ी और अर्कदेव विश्वास ने अदालत के सामने आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दे रखे। मामले पर सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल मेरिट सूची प्रकाशित करने पर रोक लगा दी। यह रोक 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। हालांकि, इसे भर्ती प्रक्रिया पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। आगे की सुनवाई में अदालत पूरे मामले और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करेगी।परीक्षा और इंटरव्यू हो चुका है पूरा
इस भर्ती प्रक्रिया की खास बात यह है कि चयन के कई महत्वपूर्ण चरण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। वर्ष 2024 में करीब 12 हजार कांस्टेबल पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में लिखित परीक्षा आयोजित हुई। लिखित परीक्षा के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी और जनवरी-फरवरी 2026 में अभ्यर्थियों के इंटरव्यू भी पूरे कर लिए गए। ऐसे में उम्मीदवारों को उम्मीद थी कि जल्द ही अंतिम मेरिट लिस्ट जारी कर दी जाएगी। लेकिन EWS आरक्षण को लेकर उठे सवाल के बाद मामला अदालत पहुंच गया और अब परिणाम का इंतजार और लंबा हो गया है।EWS आरक्षण पर क्या है विवाद?
याचिकाकर्ता का मुख्य दावा भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के पालन को लेकर है। उनका आरोप है कि संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों को भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह लागू नहीं किया गया। फिलहाल अदालत ने इन आरोपों को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है। कोर्ट का मौजूदा आदेश केवल मेरिट सूची जारी करने पर अंतरिम रोक से संबंधित है। आगे की सुनवाई में दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।हजारों अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पूरा करने के बाद उम्मीदवार मेरिट सूची का इंतजार कर रहे थे। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। उम्मीदवारों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेरिट लिस्ट कब जारी होगी और भर्ती प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ेगी।आगे क्या होगा?
अब सरकार और भर्ती से जुड़े पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अदालत EWS आरक्षण से जुड़े नियमों, भर्ती प्रक्रिया और सामने रखे गए दस्तावेजों पर आगे विचार करेगी। अगर अदालत को नियमों के उल्लंघन के आरोपों में आधार मिलता है, तो भर्ती प्रक्रिया पर आगे भी असर पड़ सकता है। वहीं, यदि सरकार संबंधित नियमों के पालन को दस्तावेजों के जरिए स्पष्ट करने में सफल रहती है, तो मेरिट सूची जारी करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल 12 हजार कांस्टेबल पदों की भर्ती का अंतिम परिणाम अदालत की अगली कार्रवाई पर निर्भर दिखाई दे रहा है। 30 सितंबर तक मेरिट लिस्ट पर रोक के कारण अभ्यर्थियों की निगाहें अब कलकत्ता हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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