WHO health report: कोविड-19 के दौर के बाद पूरी दुनिया ने यह उम्मीद की थी कि भविष्य की किसी भी महामारी से निपटने के लिए हमारी तैयारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। लेकिन, हाल ही में आई ग्लोबल प्रिपेयर्डनेस मॉनिटरिंग बोर्ड (GPMB) की रिपोर्ट ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
इबोला, हंतावायरस, मंकीपॉक्स और बर्ड फ्लू जैसे बढ़ते खतरों के बीच, यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि दुनिया भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों (Health Emergencies) के लिए पहले से अधिक कमजोर होती जा रही है।
इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से बनी इस रिपोर्ट, “ए वर्ल्ड ऑन द एज: प्रायोरिटीज फॉर ए पैंडेमिक-रेजिलिएंट फ्यूचर” के अनुसार, संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। रिपोर्ट की मानें तो महामारी से निपटने के लिए किया गया निवेश, बढ़ते हुए खतरों की तुलना में काफी कम है। वहीं वैश्विक अस्थिरता और पर्यावरण में हो रहे बदलाव स्वास्थ्य सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, गरीब देशों तक वैक्सीन और इलाज पहुंचने में बहुत अधिक देरी हो रही है जैसे मंकीपॉक्स वैक्सीन को गरीब देशों तक पहुँचने में दो साल लग गए। महामारी अब केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैज्ञानिक जानकारी पर लोगों के भरोसे को भी कम कर रही है।
WHO health report: भारत के लिए यह रिपोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी की तरह है। भारत में बड़े पैमाने पर आंतरिक पलायन, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घनी जनसंख्या के कारण भविष्य में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को अपनी बीमारी निगरानी व्यवस्था (Disease Surveillance), ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे और इमरजेंसी फंडिंग सिस्टम को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है।
महामारी के बाद बनाई गई नई स्वास्थ्य नीतियां कागजों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। वैश्विक स्तर पर समान पहुंच और बेहतर तैयारी ही अगली संभावित स्वास्थ्य आपदा से बचने का एकमात्र रास्ता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे चिकित्सा सलाह न माना जाए। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी स्थिति के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें।









