Jagannath Mandir: भारत के चार प्रमुख धामों (चारधाम) में शामिल श्री जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी नगर में स्थित है और यह भगवान श्रीकृष्ण के विशेष रूप भगवान जगन्नाथ को समर्पित है. इस मंदिर में भगवान के साथ उनके भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की भी पूजा होती है.
हर वर्ष की तरह इस बार भी जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. इस बार यह भव्य यात्रा 27 जून, शुक्रवार को निकाली जाएगी. यह आयोजन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होता है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेने पुरी पहुंचते हैं.
भगवान जगन्नाथ मंदिर की विशेषताएं और रहस्य
श्रीजगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में केवल विशिष्ट लोग ही प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन रथ यात्रा के दिन भगवान स्वयं रथ पर विराजमान होकर आम भक्तों को दर्शन देते हैं. यह दिन हर भक्त के लिए अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है.
मूर्ति में धड़कता है ‘भगवान का हृदय‘!
भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां दारु (लकड़ी) से बनती हैं और हर 12 से 19 वर्षों में इन्हें नवकलेवर परंपरा के अंतर्गत बदला जाता है. मान्यता है कि इनमें भगवान श्रीकृष्ण का जीवित हृदय स्थापित किया जाता है, जो एक रहस्यमय तत्व बना हुआ है.
ध्वनि रहस्य: मंदिर में नहीं सुनाई देती समुद्र की आवाज
श्रीजगन्नाथ मंदिर समुद्र के किनारे स्थित है, लेकिन जब आप सिंहद्वार (मुख्य द्वार) से मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो समुद्र की गर्जना अचानक शांत हो जाती है. वहीं, बाहर निकलते ही यह ध्वनि फिर से सुनाई देती है. यह रहस्य आज तक विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है.
ध्वज और नीलचक्र का चमत्कार
मंदिर के शिखर पर स्थित ध्वज प्रतिदिन बदला जाता है और यह हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है, जो सामान्य भौतिकी के नियमों के खिलाफ है. साथ ही, मंदिर के शीर्ष पर लगा नीलचक्र (धातु का चक्र) किसी भी दिशा से देखने पर सीधा सामने नजर आता है, जो एक दुर्लभ 360 डिग्री ऑप्टिकल इल्यूजन है.
प्रेमी युगल क्यों नहीं जाते मंदिर दर्शन के लिए?
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राधा रानी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए मंदिर आई थीं, लेकिन पुजारियों ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया. कारण यह बताया गया कि वे भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका थीं और मंदिर में केवल विवाहित व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति है. राधा रानी ने दुखी होकर श्राप दिया कि जो अविवाहित प्रेमी जोड़े मंदिर में एक साथ दर्शन करेंगे, उनका प्रेम कभी पूरा नहीं होगा. इसलिए आज भी प्रेमी युगल मंदिर में एक साथ दर्शन नहीं करते, और इस परंपरा का सम्मान करते हैं.











