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जब रातों-रात ढह गया था रांची का जगन्नाथपुर मंदिर… आज भी लोग भूल नहीं पाए वो मंजर

6 अगस्त 1990 की वह रात आज भी रांची के कई पुराने लोगों को याद है। जब जगन्नाथपुर मंदिर का पिछला हिस्सा अचानक ढह गया था। जानिए कैसे सिर्फ दो साल में इस ऐतिहासिक धरोहर को फिर उसी भव्यता के साथ खड़ा किया गया।

जुलाई 17, 2026
in धर्म-अध्याय, झारखंड Jharkhand News, रांची Ranchi
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जगन्नाथपुर मंदिर, रांची का वास्तविक दृश्य, जिसमें मानसून की शाम, हल्की बारिश, घने बादल, मंदिर की सुनहरी रोशनी और सामने खड़े श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं। बाईं ओर हिंदी हेडलाइन "1990 में जगन्नाथपुर मंदिर में क्या हुआ?" और नीचे "6 August 1990" का अखबारी शैली का लेबल है।

रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर से जुड़ी 6 अगस्त 1990 की एक महत्वपूर्ण घटना आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। जानिए उस दिन वास्तव में क्या हुआ था।

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समय: ~6 मिनट•हिंदी बुलेटिन

रांची में रहने वाले कई बुजुर्ग आज भी 6 अगस्त 1990 की उस सुबह को नहीं भूले हैं।

Table of Contents

Toggle
  • 300 साल पुरानी विरासत पर आई सबसे बड़ी चुनौती
  • फिर शुरू हुआ इतिहास को बचाने का मिशन
      • और पढ़ें: श्रावणी मेला 2026 को लेकर बड़ी बैठक, VIP और आउट ऑफ टर्न पूजा पर प्रशासन का बड़ा फैसला
  • क्यों खास था यह पुनर्निर्माण?
  • आज लाखों लोग आते हैं… लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं यह कहानी
      • और पढ़ें: रथ यात्रा के तीसरे दिन आखिर क्यों टूटता है भगवान जगन्नाथ के रथ का पहिया? जानिए देवी लक्ष्मी के ‘गुस्से’ की अनोखी कथा
  • यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ इतिहास नहीं… एक सीख भी है

सुबह जैसे ही लोगों को खबर मिली कि नीलांचल पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर का पिछला हिस्सा ढह गया है, पूरे शहर में चिंता की लहर दौड़ गई।

📌 यह भी पढ़ें:
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  • JAP-1 की अनोखी दुर्गा पूजा: यहां नहीं होती मां की प्रतिमा स्थापित, कलश पूजा से निभाई जाती है 146 साल पुरानी परंपरा
  • अनूप माझी उर्फ लाला के सिंडिकेट पर ED का शिकंजा, कुल कुर्की 815 करोड़ के पार

जिस मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आते थे…

जिस मंदिर की रथ यात्रा रांची की पहचान मानी जाती थी…

खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट
Exclusive Report
खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट

उसी मंदिर को अचानक इस हालत में देखकर लोगों को यकीन ही नहीं हुआ।

लेकिन यह कहानी सिर्फ एक मंदिर के गिरने की नहीं है।

यह कहानी है रांची की आस्था, विरासत और उस जज्बे की, जिसने टूटी हुई दीवारों को फिर से खड़ा कर दिया।

झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण
Special Coverage
झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण

300 साल पुरानी विरासत पर आई सबसे बड़ी चुनौती

जगन्नाथपुर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है।

झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
Special Report

यह रांची की पहचान है।

हर साल यहां निकलने वाली भव्य रथ यात्रा झारखंड ही नहीं, बल्कि ओडिशा, बंगाल, बिहार और देश के कई हिस्सों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

लेकिन 6 अगस्त 1990 को मंदिर के पिछले हिस्से के ढहने की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया।

लोगों के मन में एक ही सवाल था-

क्या अब यह ऐतिहासिक मंदिर पहले जैसा बन पाएगा?

फिर शुरू हुआ इतिहास को बचाने का मिशन

राज्य के विशेषज्ञों, इंजीनियरों और पारंपरिक कारीगरों ने फैसला लिया कि मंदिर को आधुनिक तरीके से नहीं, बल्कि उसी ऐतिहासिक स्वरूप में दोबारा बनाया जाएगा।

करीब फरवरी 1992 तक पुनर्निर्माण का काम पूरा हुआ।

उस समय इस परियोजना पर लगभग ₹1 करोड़ खर्च किए गए, जो उस दौर के हिसाब से बड़ी राशि थी।

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क्यों खास था यह पुनर्निर्माण?

इसका उद्देश्य केवल टूटी हुई दीवारें खड़ी करना नहीं था।

बल्कि 300 साल पुरानी विरासत को बचाना था।

इसीलिए-

खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive

  •  कलिंग शैली की मूल वास्तुकला को बरकरार रखा गया।
  •  सुर्खी-चूने से जुड़े प्रस्तर खंडों का उपयोग किया गया।
  •  कार्निश और शिखर में पारंपरिक पतली ईंटें लगाई गईं।
  •  मंदिर की ऐतिहासिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया गया।

आज भी मंदिर को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सके कि यह कभी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था।

आज लाखों लोग आते हैं… लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं यह कहानी

आज जब रथ यात्रा के दौरान नीलांचल पहाड़ी पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है…

तो शायद उनमें से बहुत कम लोगों को पता होता है कि यही मंदिर कभी ढह चुका था।

अगर उस समय इसका संरक्षण नहीं किया जाता…

तो संभव है कि रांची अपनी सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में से एक खो देता।

और पढ़ें: रथ यात्रा के तीसरे दिन आखिर क्यों टूटता है भगवान जगन्नाथ के रथ का पहिया? जानिए देवी लक्ष्मी के ‘गुस्से’ की अनोखी कथा

यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ इतिहास नहीं… एक सीख भी है

कई विरासतें समय के साथ खत्म हो जाती हैं।

लेकिन कुछ विरासतें इसलिए बच जाती हैं…

क्योंकि लोग उन्हें सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं, अपनी पहचान मानते हैं।

जगन्नाथपुर मंदिर उसी पहचान का नाम है।

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