Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 से जुड़े एक मामले में अहम कानूनी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी नाबालिग लड़की का हाथ पकड़कर केवल शादी का प्रस्ताव दिया जाता है और उसके पीछे यौन या अशोभनीय मंशा (Sexual Intent) साबित नहीं होती, तो मात्र इस आधार पर उसे महिला की लज्जा भंग करने का अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस राजेश कुमार की एकल पीठ ने सरायकेला-खरसावां की विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए आरोपी गुड्डू मुर्मू की आपराधिक अपील स्वीकार कर उसे बरी कर दिया।
स्कूल से लौट रही 10 वर्षीय बच्ची को रास्ते में रोककर शादी का प्रस्ताव देने का आरोप
यह मामला 21 जून 2017 का है। सरायकेला-खरसावां जिले में 10 वर्षीय एक बच्ची स्कूल से अपने घर लौट रही थी। आरोप था कि रास्ते में गुड्डू मुर्मू ने उसका हाथ पकड़ लिया, उससे शादी करने की बात कही और उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
बच्ची द्वारा शोर मचाने पर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे आरोपी के कब्जे से छुड़ा लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 तथा पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।
Jharkhand High Court: विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी सजा
सरायकेला-खरसावां की विशेष पॉक्सो अदालत ने 22 अगस्त 2023 को आरोपी को दोषी ठहराया था। इसके बाद 28 अगस्त 2023 को अदालत ने उसे IPC की धारा 354 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा निचली अदालत का फैसला?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस राजेश कुमार की एकल पीठ ने पीड़िता के बयान और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया।
अदालत ने पाया कि पीड़िता के बयान के अनुसार आरोपी ने कुछ समय के लिए उसका हाथ पकड़ा और उससे शादी करने की बात कही थी। हालांकि, उसके बयान में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि आरोपी ने कोई अशोभनीय हरकत की, अनुचित स्पर्श किया या उसकी मंशा यौन प्रकृति की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 354 लागू होने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी का उद्देश्य महिला की लज्जा भंग करना या उसके प्रति यौन अथवा अशोभनीय मंशा रखना था। यदि अभियोजन पक्ष इस आवश्यक तत्व को साबित नहीं कर पाता, तो केवल हाथ पकड़ने और शादी का प्रस्ताव देने के आधार पर इस धारा के तहत दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
अभियोजन पक्ष आवश्यक तत्व साबित नहीं कर सका
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी की कथित यौन या अशोभनीय मंशा साबित करने में विफल रहा। इसलिए IPC की धारा 354 के तहत दोषसिद्धि कानूनी कसौटी पर टिक नहीं सकती।
इसी आधार पर अदालत ने विशेष पॉक्सो अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी की आपराधिक अपील स्वीकार कर ली और उसे आरोप से बरी कर दिया।








