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रथ यात्रा के तीसरे दिन आखिर क्यों टूटता है भगवान जगन्नाथ के रथ का पहिया? जानिए देवी लक्ष्मी के ‘गुस्से’ की अनोखी कथा

रथ यात्रा के तीसरे दिन होने वाली हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा, देवी लक्ष्मी की नाराज़गी और भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा यात्रा से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा।

जुलाई 16, 2026
in धर्म-अध्याय
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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का पोस्टर जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ रथ और हेरा पंचमी की कथा का उल्लेख है।

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान हेरा पंचमी और देवी लक्ष्मी के गुस्से की पौराणिक कथा।

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समय: ~7 मिनट•हिंदी बुलेटिन

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे प्रसिद्ध रथ यात्राओं में से एक भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ी ऐसी भी एक कथा है, जिसमें स्वयं देवी लक्ष्मी क्रोधित होकर रथ का पहिया तोड़ देती हैं?

Table of Contents

Toggle
  • जब भगवान जगन्नाथ बिना लक्ष्मी जी के निकल पड़े…
  • तीसरे दिन पहुंचती हैं देवी लक्ष्मी…
  • फिर भगवान को खुद मनाने जाना पड़ता है…
  • 9 दिन बाद होती है बहुड़ा यात्रा
  • इस कथा का संदेश क्या है?

पहली बार सुनने पर यह कहानी किसी पौराणिक नाटक जैसी लग सकती है। लेकिन सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे प्रेम, मान-मनुहार और दांपत्य संबंधों का ऐसा भाव छिपा है, जो आज भी लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर देता है।

📌 यह भी पढ़ें:
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जब भगवान जगन्नाथ बिना लक्ष्मी जी के निकल पड़े…

रथ यात्रा शुरू होती है तो भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से निकलकर मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) की ओर प्रस्थान करते हैं। मान्यता है कि वे वहां 9 दिनों तक विश्राम करते हैं।

लेकिन इसी बीच एक सवाल उठता है…

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क्या भगवान अपनी अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी को साथ लेकर गए थे?

लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, नहीं।

यहीं से शुरू होती है इस कथा का सबसे रोचक अध्याय।

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तीसरे दिन पहुंचती हैं देवी लक्ष्मी…

रथ यात्रा के तीसरे दिन देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने मौसीबाड़ी पहुंचती हैं।

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लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें पता चलता है कि भगवान उनसे मिलने बाहर नहीं आते। कई परंपराओं में इसे प्रतीकात्मक रूप से इस तरह दर्शाया जाता है कि मंदिर का द्वार बंद मिलता है।

यहीं से देवी लक्ष्मी नाराज़ हो जाती हैं।

कथा के अनुसार, अपने क्रोध में वे भगवान जगन्नाथ के रथ का एक पहिया प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती हैं और बिना मिले वापस श्रीमंदिर लौट जाती हैं।

इसी घटना को कई स्थानों पर ‘हेरा पंचमी’ से जोड़ा जाता है, जिसे हर वर्ष विशेष धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।

फिर भगवान को खुद मनाने जाना पड़ता है…

कहानी यहीं समाप्त नहीं होती।

जब भगवान जगन्नाथ को देवी लक्ष्मी की नाराज़गी का पता चलता है, तो वापसी यात्रा के दौरान वे स्वयं उन्हें मनाने का प्रयास करते हैं।

लोक परंपराओं में यह प्रसंग प्रेम, सम्मान, रूठने-मनाने और दांपत्य जीवन की मधुर नोक-झोंक का प्रतीक माना जाता है।

यही कारण है कि यह कथा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों के दिलों को छू जाती है।

9 दिन बाद होती है बहुड़ा यात्रा

मौसीबाड़ी में नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।

इस वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा (Bahuda Yatra) कहा जाता है। कई क्षेत्रों में इसे स्थानीय नामों से भी जाना जाता है।

यह केवल वापसी नहीं होती, बल्कि पूरे उत्सव का भावनात्मक समापन भी मानी जाती है।

खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive

इस कथा का संदेश क्या है?

इस लोकप्रिय पौराणिक परंपरा का उद्देश्य केवल एक रोचक कहानी सुनाना नहीं है।

यह हमें बताती है कि 

  • प्रेम में मान-मनुहार भी होता है।
  • रिश्तों में संवाद और सम्मान का महत्व सबसे बड़ा है।
  • देवी-देवताओं की कथाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति ने मानवीय भावनाओं को भी जीवंत रूप दिया है।

इसी कारण रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परिवार, परंपरा और आस्था का जीवंत उत्सव मानी जाती है।

और पढ़ें: रांची में निकली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा, भारी संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

ध्यान दें: देवी लक्ष्मी द्वारा रथ का पहिया तोड़ने की यह कथा प्राचीन धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित लोकप्रिय पौराणिक वर्णन है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में इसके विवरण में कुछ अंतर मिल सकते हैं।

जब अगली बार आप भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा देखें, तो केवल विशाल रथ और भक्तों की भीड़ ही नहीं, बल्कि उस प्रेम, प्रतीक्षा, रूठने-मनाने और आस्था की कहानी को भी याद कीजिए, जिसने इस उत्सव को सदियों से जीवित रखा है।

क्या आपने यह पौराणिक कथा पहले कभी सुनी थी? नीचे कमेंट करके जरूर बताइए और इस रोचक कथा को अपने परिवार व दोस्तों के साथ शेयर करें।

 

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