Sitting job side effects: आज के दौर में लाखों लोग ऑफिस, बैंक, आईटी कंपनी या घर से काम (Work From Home) करते हुए रोजाना 8 से 10 घंटे तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। काम की व्यस्तता में यह आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक लगातार बैठे रहना शरीर के लिए कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बीच-बीच में शरीर को सक्रिय न रखा जाए तो इसका असर केवल पीठ या गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिल, मांसपेशियों, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
पहली नजर में यह सामान्य दिनचर्या लग सकती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहना (Sedentary Lifestyle) शरीर के लगभग हर हिस्से को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इसे आज के समय की सबसे बड़ी लाइफस्टाइल चुनौतियों में गिना जा रहा है।
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आइए जानते हैं कि आखिर लगातार बैठने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
1. रीढ़ की हड्डी (Spine) पर बढ़ता है दबाव
मानव शरीर लंबे समय तक बैठने के लिए नहीं बना है। जब आप घंटों तक एक ही कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो सबसे ज्यादा दबाव रीढ़ की हड्डी, खासकर कमर के निचले हिस्से (Lower Back) पर पड़ता है। यदि आपकी कुर्सी या बैठने का तरीका सही नहीं है तो-
- कमर दर्द शुरू हो सकता है।
- गर्दन में अकड़न रहती है।
- कंधों में तनाव बढ़ता है।
- रीढ़ की प्राकृतिक बनावट प्रभावित हो सकती है।
समय के साथ यह दर्द पुराना (Chronic Pain) भी बन सकता है।
2. गर्दन झुकाकर काम करना बन सकता है बड़ी समस्या
मोबाइल या लैपटॉप की ओर लगातार गर्दन झुकाकर देखने से “टेक्स्ट नेक” (Text Neck) की समस्या बढ़ रही है। इसके कारण-
- सिरदर्द
- गर्दन में जकड़न
- कंधे का दर्द
- हाथों में झुनझुनी
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है
जब शरीर लगातार निष्क्रिय रहता है तो ऊर्जा की खपत कम हो जाती है। इससे-
- कैलोरी कम बर्न होती है।
- शरीर में फैट जमा होने लगता है।
- ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
यही कारण है कि लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम अधिक देखा गया है।
4. पेट की चर्बी तेजी से बढ़ सकती है
यदि आप पूरे दिन बैठे रहते हैं और बीच-बीच में चलना-फिरना कम होता है, तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को फैट के रूप में जमा करने लगता है। सबसे पहले चर्बी जमा होती है-
- पेट के आसपास
- कमर पर
- जांघों में
यही आगे चलकर मोटापे की वजह बन सकती है।
5. हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है
कम शारीरिक गतिविधि का सीधा असर हृदय पर पड़ता है। नियमित रूप से बैठे रहने से-
- रक्त संचार धीमा पड़ सकता है।
- खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
- हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ सकता है।
- दिल की बीमारियों की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए विशेषज्ञ केवल जिम जाने पर नहीं, बल्कि पूरे दिन सक्रिय रहने पर भी जोर देते हैं।
6. पैरों में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है
घंटों एक ही जगह बैठे रहने से पैरों की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। इसका असर-
- पैरों में सूजन
- भारीपन
- झुनझुनी
- मांसपेशियों में जकड़न
के रूप में दिखाई दे सकता है। बहुत लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठना कुछ लोगों में ब्लड क्लॉट (Deep Vein Thrombosis – DVT) का जोखिम भी बढ़ा सकता है, हालांकि यह जोखिम सभी में समान नहीं होता।
7. मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं
बैठे रहने से सबसे कम सक्रिय होती हैं-
- ग्लूट्स (Hip Muscles)
- पेट की मांसपेशियां
- पैरों की मांसपेशियां
धीरे-धीरे इनकी ताकत कम होने लगती है। इसके कारण-
- सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल लग सकता है।
- शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
- चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।
8. आंखों पर बढ़ता है स्क्रीन का दबाव
ऑफिस जॉब में लगातार स्क्रीन देखने से-
- आंखों में सूखापन
- धुंधला दिखना
- आंखों में जलन
- सिरदर्द
जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। हर 20 मिनट बाद, 20 सेकंड के लिए, 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।
9. मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है
लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और लगातार काम का दबाव-
- तनाव
- थकान
- चिड़चिड़ापन
- ध्यान की कमी
जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। यदि इसमें पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जुड़ जाए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
10. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकती हैं समस्याएं
40 वर्ष की उम्र के बाद लंबे समय तक बैठे रहने का असर और ज्यादा दिखाई देने लगता है क्योंकि-
- मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से कमजोर होने लगती हैं।
- हड्डियों की मजबूती कम होती है।
- वजन तेजी से बढ़ सकता है।
- जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है।
इसलिए उम्र बढ़ने के साथ नियमित गतिविधि और भी जरूरी हो जाती है।
क्या सिर्फ सुबह जिम जाना काफी है?
यह एक आम गलतफहमी है। यदि आपने सुबह 45 मिनट व्यायाम किया लेकिन बाकी 9–10 घंटे लगातार बैठे रहे, तो लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के कुछ जोखिम बने रह सकते हैं। यानी- Exercise जरूरी है, लेकिन पूरे दिन Active रहना भी उतना ही जरूरी है।
WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार-
- हर 30–60 मिनट बाद कुर्सी से उठें।
- कम से कम 2–5 मिनट चलें।
- फोन पर बात करते समय खड़े रहें।
- पानी लेने खुद जाएं।
- लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- रोज कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि (जैसे तेज़ चाल से चलना या साइकिल चलाना) करने का लक्ष्य रखें।
- सप्ताह में कम से कम 2 दिन मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम करें।
ऑफिस में अपनाएं ये 10 आसान हेल्थ हैक्स
- हर घंटे अलार्म लगाएं।
- पानी की बोतल थोड़ी दूर रखें ताकि उठना पड़े।
- लंच के बाद 10–15 मिनट पैदल चलें।
- बैठते समय पैर जमीन पर टिके रहें।
- स्क्रीन आंखों की सीध में रखें।
- कमर को सपोर्ट देने वाली कुर्सी का उपयोग करें।
- स्ट्रेचिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- मोबाइल पर झुककर देखने की बजाय उसे आंखों की ऊंचाई तक लाएं।
- हर दिन 7–8 घंटे की नींद लें।
- छुट्टी के दिन भी सक्रिय रहें।
रोज 8 घंटे बैठकर काम करना आधुनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन लगातार बिना ब्रेक के बैठे रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अच्छी बात यह है कि छोटे-छोटे बदलाव-जैसे नियमित अंतराल पर उठना, थोड़ी देर चलना, सही पॉश्चर बनाए रखना और रोजाना व्यायाम करना-इन जोखिमों को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं।
यदि कमर, गर्दन, पैरों में लगातार दर्द, बार-बार सुन्नपन, या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना उचित है।
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कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








