KhabarMantra: नौ साल की बिनीता चेत्री, असम के कार्बी आंगलोंग की रहने वाली, ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट के फाइनल में पहुँचने वाली उत्तर-पूर्व भारत की पहली बच्ची बनी हैं. उनकी यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
मेहनत और सपनों की कहानी
बिनीता का सफर छोटे से गाँव से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने सीमित संसाधनों में नृत्य और मार्शल आर्ट का अभ्यास किया. अपने पिता के साथ ब्रिटेन जाने के बाद, उन्होंने अपनी कला से भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर प्रस्तुत किया.
सेमी-फाइनल में उन्होंने “आई ऑफ द टाइगर” की धुन पर शानदार प्रदर्शन किया. उनकी ऊर्जा, लय और संतुलन ने दर्शकों और जजों को मंत्रमुग्ध कर दिया. जज ब्रूनो टोनीओली ने कहा, “तुम्हारी ताकत बाघ जैसी है और लचीलापन अजगर जैसा.”अलेशा डिक्सन ने उनकी अनूठी प्रतिभा की तारीफ की, और साइमन कॉवेल ने उनके सफर को जादुई बताया.
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छोटी-सी इच्छा ‘पिंक प्रिंसेस हाउस’
परफॉर्मेंस के बाद बिनीता ने कहा कि वह प्रतियोगिता जीतकर “पिंक प्रिंसेस हाउस” खरीदना चाहती हैं. उनकी यह मासूम ख्वाहिश सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, और उन्हें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उद्योगपति आनंद महिंद्रा समेत कई बड़े लोगों का समर्थन मिला .
उत्तर-पूर्व भारत के लिए गर्व का पल
बिनीता की सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इस क्षेत्र को अक्सर मुख्यधारा में नजरअंदाज किया जाता रहा है, लेकिन अब उनकी प्रतिभा ने यह साबित कर दिया है कि यहाँ के कलाकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं.
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अब 31 मई को ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट 2025 का ग्रैंड फिनाले होगा, जिसमें बिनीता कई प्रतिभाशाली प्रतियोगियों के साथ मुकाबला करेंगी. जीत हो या हार, उनकी कहानी इतिहास में दर्ज हो चुकी है.













