जहां एक ओर मध्य प्रदेश सरकार ने भीमबेटका गुफाओं में आदिमानव काल की चित्रकला को सहेज कर विश्व विरासत का दर्जा दिलाया है, वहीं दूसरी ओर झारखंड के हजारीबाग जिले स्थित इस्को गुफा की दुर्लभ प्राचीन चित्रकला आज भी उपेक्षा और बदहाली का शिकार है।
मध्यप्रदेश और झारखंड — दोनों राज्यों में हजारों साल पुरानी गुफाएं हैं, जिनकी दीवारों पर आदिमानवों ने पेंटिंग बनाई थी. एक तरफ मध्यप्रदेश की भीमबेटका गुफाएं, जहां सरकार ने इन ऐतिहासिक पेंटिंग को संभाल कर रखा है, वहीं दूसरी ओर है झारखंड की इस्को गुफा, जो बिलकुल उपेक्षित है और जहां लोग दीवारों पर अपने नाम और प्यार की बातें लिख रहे हैं.
भीमबेटका: दुनिया में मशहूर और अच्छी तरह से सुरक्षित
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका गुफाएं हजारों साल पुरानी मानी जाती हैं. यहां की दीवारों पर आदिमानवों ने शिकार, नाच-गाना और जानवरों के चित्र बनाए थे.
सरकार ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया है. यहां:
- साफ-सफाई रहती है,
- पर्यटकों के लिए गाइड और जानकारी के बोर्ड हैं,
- लोग यहां आकर इतिहास और कला को करीब से देखते हैं.
- पूरे क्षेत्र में सुरक्षा, गाइड, साइनबोर्ड और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं.
यही वजह है कि इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. हर वर्ष यहां हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और राज्य को आय प्राप्त हो रही है.
इस्को गुफा: ऐतिहासिक धरोहर बन गई दीवारों पर इश्क की कहानी
हजारीबाग जिले के बड़कागांव में स्थित इस्को गुफा भी करीब 10,000 साल पुरानी है. यहां भी दीवारों पर बहुत सुंदर पेंटिंग हैं जो आदिवासी जीवन और शिकार के दृश्य दिखाते हैं.
लेकिन अफसोस की बात यह है कि:
- इस गुफा की कोई सुरक्षा नहीं है,
- न सफाई, न कोई गाइड या जानकारी,
- और आजकल के लड़के-लड़कियां यहां जाकर दीवारों पर अपने नाम और दिल की बातें लिख रहे हैं.
इससे इतिहास मिटता जा रहा है.
दोनों राज्यों की तुलना
बात |
मध्यप्रदेश (भीमबेटका) |
झारखंड (इस्को गुफा) |
| संरक्षण | अच्छी तरह से सुरक्षित | कोई ध्यान नहीं |
| प्रचार-प्रसार | राज्य पर्यटन में शामिल | कोई प्रचार नहीं |
| सफाई और व्यवस्था | साफ और व्यवस्थित | गंदगी और उपेक्षा |
| सुरक्षा | गार्ड और कैमरे लगे हैं | कोई निगरानी नहीं |
सरकार कब जागेगी?
भीमबेटका जैसी गुफाएं पूरे देश का गर्व हैं. झारखंड की इस्को गुफा भी उतनी ही खास है, लेकिन यहां की हालत देखकर दुख होता है. झारखंड सरकार को चाहिए कि इस्को गुफा को सुरक्षित बनाए, दीवारों पर लिखे नाम साफ करवाए, और इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे.













