रांची: राजधानी रांची को अतिक्रमण से मुक्त कर व्यवस्थित यातायात और स्वच्छ वातावरण देने की दिशा में नगर निगम ने कमर कस ली है। नगर प्रशासक सुशांत गौरव के नेतृत्व में अब दो पालियों में विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में निगम की प्रवर्तन टीम को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं।
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नगर प्रशासक स्वयं फील्ड में उतरकर हालात का लेंगे जायजा
प्रवर्तन शाखा ने अभियान की गति तेज करने के लिए प्रशासन से चार जेसीबी मशीनें और आठ ट्रैक्टरों की मांग की है, जिससे हटाए गए अतिक्रमण को तुरंत हटाकर जगह को खाली कराया जा सके। नगर प्रशासक स्वयं भी फील्ड में उतरकर हालात का जायजा ले रहे हैं। निगम का मानना है कि पर्याप्त संसाधनों से अभियान ज्यादा प्रभावी तरीके से चलाया जा सकता है।
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ITI बस स्टैंड की जर्जर हालत का क्या
हालांकि, इस अभियान के बीच रांची के ITI बस स्टैंड की जर्जर हालत नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। बता दें कि यह झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा बस अड्डा है, जहां से चतरा, लोहरदगा, पलामू सहित बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए रोजाना दर्जनों बसें चलती हैं। लेकिन जब खबर मंत्र की टीम वहां पहुंची थी तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि यह दूसरा सबसे बड़ी बस स्टैंड है। स्टैंड में यात्रियों और बस संचालकों को बदबू, गंदगी और जलजमाव से जूझना पड़ रहा है। गंदा पानी सड़कों तक फैल हुआ है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी होती है।
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ITI बस स्टैंड से कहीं बेहतर है जिला का बस स्टैंड
कई यात्रियों ने बात चित के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वे अपने जिले से रांची पहुंचते हैं, तो विश्वास नहीं होता कि ये राज्य की राजधानी है। उनके मुताबिक, कई जिलों के बस स्टैंड ITI बस स्टैंड से कहीं बेहतर हैं। वहीं बस मालिकों का आरोप है कि निगम हर बस से प्रतिदिन ₹100 वसूलता है, जिससे करोड़ों रुपये का वार्षिक राजस्व जमा होता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता।
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हर साल करोड़ों का टेंडर होता है जारी
जानकारी के अनुसार, ITI बस स्टैंड के रखरखाव और विकास के लिए हर साल करोड़ों का टेंडर जारी होता है, लेकिन जमीनी हकीकत सिर्फ कागजों में सीमित रह जाती है। बस संचालकों का कहना है कि निगम सिर्फ दुकानें हटाने में सक्रिय रहता है, लेकिन सफाई, पीने के पानी और बैठने की सुविधा जैसे बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं देता।
राज्य निर्माण के 25 साल लेकिन स्टैंड की हालत जस के तस
देखा जाए तो राज्य निर्माण के 25 साल बाद भी ITI बस स्टैंड की हालत जस की तस है। ऐसे में नगर निगम से यह उम्मीद की जा रही है कि सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित न रहकर सार्वजनिक स्थानों की मूलभूत व्यवस्था को भी प्राथमिकता दे, खासकर उन जगहों पर जहां से हजारों लोग रोजाना सफर करते हैं।
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