Religion News: भाई दूज हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वीतीया तिथि को मनाया जाता है. वहीं, इस साल 23 अक्टूबर को यह त्योहार मनाया जाएगा. मालूम हो, इस दिन बहने अपने भाईयों के लंबी उम्र के लिए पूजा करती है. और इसके बदले भाई अपने बहनों को तोहफे भी देते हैं. भाई दूज को अलग-अगल जगह, अलग-अलग नाम से जाना जाता है. जैसे: यम द्वितीया, भाई द्वितीया, भाऊ बीज और भतरु द्वितीया.
क्या होता है गोधन, बहन क्यों अपनी जीभ में चुभातीं है कांटा?
बिहार-झारखंड में इस दिन को गोधन कहा जाता है. यहां बहनें अपने घर के द्वार पर गोबर से यमलोक और सर्प-बिच्छुओं की आकृति बना कर, यमराज और अपने भाई के दुश्मनों को मुसल से कुट-कुटकर पीटती हैं और गीत गाती हैं. इस दौरान वें पहले अपनें भाई को गाली देती है, फिर अपनी जीभ में कांटा चूभातीं है. और फिर, अपने भाईयों के कुटा हुआ बजरा-चाना खिलाकर उनके लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करतीं है.
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भाई दूज पर राहु काल का छाया!
पंचांग के अनुसार, इस साल भाई दूज पर राहु काल का काला छाया रहने वाला है. मान्यता के अनुसार, राहु काल में की भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. बता दें, राहु काल 23 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से शुरु होकर 2 बजकर 54 मिनट तक रहेगा.
भाई को टीका करने का शुभ मुहूर्त
- पहला मुहूर्त- दोपहर 1 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा
- दूसरा अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक
- तीसरा विजय मुहूर्त- दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगा
- चौथा गोधूली मुहूर्त- शाम 5 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 09 मिनट तक रहेगा
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