Jharkhand News: झारखंड में सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी सेवा समाप्ति के बाद भी सरकारी आवासों पर अवैध रूप से जमे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
Read more- रांची में बढ़ा पारा, लोगों को मिली राहत, पर इन जिलों में अभी भी ठंड का कहर
इस पूरे मामले को राबता हज कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता हाजी मतलूब इमाम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में लाया। हाजी मतलूब इमाम ने सोशल मीडिया के माध्यम से सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं करने की जानकारी साझा की और कार्रवाई की मांग की।
मां.मुख्यमंत्री जी जोहार जानकारी के अनुसार वन विभाग के कुछ उच्च अधिकारी कई माह पुर्व सेवा निवृत्त होगये हैं लेकिन आज तक सरकारी आवास एवं सुविधाएं अभी तक ले रहे हैं जो चिंता का विषय है एवं अनुसाशन हिनता दर्शाता है?अनुरोध है श्रीमान इसपर उचित कार्रवाई की जरूरत है।@HemantSorenJMM
— Haji Matloob Imam (@MatloobImam) December 14, 2025
जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री का त्वरित एक्शन
मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को जांच और उचित कार्रवाई का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब वन विभाग के उन सेवानिवृत्त अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है, जो नियमों को ताक पर रखकर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
.@JharkhandVan तत्काल संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही सुनिश्चित करें एवं सूचना दें। https://t.co/yosx9yz6lk
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) December 14, 2025
किन अधिकारियों पर है आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिन सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए रखने का आरोप है, उनमें एन.के. सिंह, सना सिंह, अशोक कुमार और सक्सेना के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि खबर मंत्र द्वारा पहले यह खुलासा किया गया था कि अशोक कुमार एक नहीं बल्कि दो-दो सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
Read more- Holiday Alert: 2026 में 34 दिन की छुट्टी! झारखंड का अवकाश कैलेंडर जारी
कानून क्या कहता है
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी आवास में रहना गैरकानूनी है। नियमों के तहत 6 महीने के बाद 10 गुना किराया और अधिक समय तक कब्जा रहने पर 30 गुना तक जुर्माना वसूला जा सकता है। साथ ही बेदखली, पेंशन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश स्पष्ट हैं कि सरकारी आवास केवल सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए होते हैं।












