मनरेगा कानून और इसके नाम में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी 5 जनवरी को ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत बापू वाटिका (मोराबादी) से लोक भवन तक पैदल मार्च करेगी। यह जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर यह आंदोलन तीन चरणों में चलाया जाएगा। पहले चरण में 8 जनवरी को राज्य प्रभारी के साथ तैयारी बैठक, 10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और 11 जनवरी को गांधी या अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास व धरना आयोजित किया जाएगा।
दूसरे चरण में 12 से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच पत्र वितरण, विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभा और पंपलेट वितरण किया जाएगा। 30 जनवरी (शहीद दिवस) को मनरेगा कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों के साथ बैठक होगी।
तीसरे चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय धरना, 7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा/लोक भवन घेराव और 16 से 25 फरवरी के बीच देशभर में क्षेत्रीय स्तर पर चार रैलियों का आयोजन प्रस्तावित है।
केशव महतो कमलेश ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना और योजनाओं के चयन की प्रक्रिया में बदलाव ग्रामीण भारत पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उनके अनुसार पहले योजनाओं का चयन गांव स्तर पर होता था, जबकि अब केंद्र द्वारा चयन से क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है और कोरोना काल में इसने संकट के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि मनरेगा के नाम में बदलाव सरकार की सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के विस्तार और ग्रामीण क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान नहीं किए गए हैं, जिससे श्रमिकों को नुकसान होगा।
पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि मनरेगा लागू होने के समय सभी दलों ने इसकी उपयोगिता स्वीकार की थी और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में राज्यों के साथ अंशदान अनुपात (60:40) से झारखंड जैसे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि योजना में कमियां थीं तो उनमें सुधार किया जाना चाहिए था।
संवाददाता सम्मेलन में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, सोनाल शांति, कमल ठाकुर और राजन वर्मा उपस्थित थे।












