Ranchi News: धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता हुए भाई–बहन अंश और अंशिका की सकुशल बरामदगी भले ही राहत की खबर है, लेकिन पूरा घटनाक्रम झारखंड के पुलिसिया तंत्र और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल छोड़ जाता है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में बड़ा उद्भेदन किया जाएगा, लेकिन अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर कई पहलुओं पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
घर से तीन किलोमीटर, लेकिन सिस्टम नाकाम
सूत्रों के मुताबिक, अपहरण के बाद शुरुआती पांच दिनों तक दोनों बच्चे अपने घर से महज तीन किलोमीटर के दायरे में ही थे। इसके बावजूद पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां उनका पता नहीं लगा सकीं। सूत्र बताते हैं कि इसी दौरान आरोपी बच्चों को लेकर रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पहुंचे और आसपास ही उन्हें छिपाकर रखा गया था, जबकि उसी समय स्टेशन और बस अड्डों पर तलाशी अभियान चलने का दावा किया जा रहा था।
Ranchi News: तलाशी के दावे और जमीनी हकीकत
सूत्रों का कहना है कि जांच के नाम पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी फुटेज और वाहनों की तलाशी का आंकड़ा पेश किया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर ठोस सूचना तंत्र और मानवीय इनपुट को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह रही कि बच्चे उन्हीं इलाकों में रहे, जहां कथित तौर पर सघन जांच चल रही थी।
शक की बुनियाद पर बर्बरता
इस मामले का सबसे गंभीर और शर्मनाक पहलू एक गरीब दुकानदार और उसके परिवार के साथ हुई पुलिसिया कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, केवल इस आधार पर कि बच्चे आखिरी बार उसकी दुकान पर देखे गए थे और उसके कोई संतान नहीं थी, पुलिस ने पूरे परिवार को हिरासत में ले लिया। कई दिनों तक पूछताछ और मारपीट हुई। दुकानदार की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसके दोनों कानों से सुनाई देना लगभग बंद हो गया। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई जांच थी या जल्दबाजी में लिया गया फैसला?
समाज की सक्रियता से मिली सफलता
सूत्र बताते हैं कि बच्चों की तस्वीरें और जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर फैलीं, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर खोजबीन तेज कर दी। इसी प्रयास के बाद बच्चों का पता चल सका। यह तथ्य पुलिस के दावों के उलट तस्वीर पेश करता है।
आरोपी और जांच का दायरा
पुलिस ने एक युवक और एक युवती को गिरफ्तार किया है, जो खुद को पति–पत्नी बताकर बच्चों के साथ रह रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में कई अहम कड़ियां सामने आई हैं और आशंका जताई जा रही है कि मामला केवल अपहरण तक सीमित नहीं हो सकता। हालांकि पुलिस ने अभी इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अब भी कई अनुत्तरित सवाल
- जब बच्चे पास ही थे, तो पुलिस उन्हें क्यों नहीं खोज पाई?
- निर्दोष लोगों पर हुए कथित अत्याचार की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- क्या जांच एजेंसियों के दावे और वास्तविकता में बड़ा अंतर है?
- क्या बिना सामाजिक दबाव के यह मामला सुलझ पाता?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। लेकिन सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारियां यह संकेत देती हैं कि यह मामला केवल एक अपहरण नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। सच क्या है, यह आने वाली जांच में सामने आएगा, लेकिन तब तक सवाल पूछना जरूरी है—क्योंकि जवाबदेही के बिना सुधार संभव नहीं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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