Dhanbad News/ Ram Murti Pathak: धनबाद कोयलांचल की राजनीति में इन दिनों कोयले की तपिश से ज्यादा चुनावी सरगर्मी महसूस की जा रही है। धनबाद नगर निगम चुनाव के ऐलान के साथ ही भाजपा के अंदर मचे घमासान ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
अपनों की बगावत ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन
सियासी पारा तब चढ़ गया जब भाजपा ने संजीव अग्रवाल को मेयर प्रत्याशी के रूप में अपना आधिकारिक समर्थन दिया। पार्टी के इस फैसले ने लंबे समय से भाजपा का चेहरा रहे पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को बागी बना दिया। उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ झारखंड मुक्ति मोर्चा का हाथ थाम लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर अग्रवाल का जाना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सिंह मेंशन की एंट्री आमने-सामने होंगे दिग्गज
Dhanbad News: मुकाबला तब और पेचीदा हो गया जब झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने भी मैदान में उतरने का फैसला किया। एक ही विचारधारा और पृष्ठभूमि से आने वाले दिग्गजों के आमने-सामने होने से मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है। संजीव सिंह की दावेदारी ने न केवल भाजपा के कोर वोट बैंक में संशय पैदा किया है, बल्कि समर्थकों को भी दोफाड़ कर दिया है।
वोटर पशोपेश में आखिर वोट करे तो करे कहा
शहर के चौक-चौराहों पर बस एक ही सवाल तैर रहा है वोट दें तो किसे दें? मतदाताओं के सामने दुविधा यह है कि मैदान में मौजूद प्रमुख चेहरे एक समय पर एक ही खेमे का हिस्सा थे। अब यह अपने लिए वोट मांगेगे।
Dhanbad News: विकास या वर्चस्व?
जहाँ एक तरफ प्रत्याशी विकास और नगर निगम की सूरत बदलने के दावे कर रहे हैं, वहीं जनता इसे ‘वर्चस्व की जंग’ के रूप में देख रही है। जानकार पंडितों की मानें तो वोटों का यह बिखराव किसी ‘तीसरे’ या नए चेहरे के लिए भी रास्ता खोल सकता है। अब देखना यह होगा कि धनबाद की जनता विकास के नारों पर भरोसा जताती है या इस सियासी रस्साकशी में कोई नया समीकरण जन्म लेता है।











