Ranchi: राजधानी रांची में बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। तेजी से बढ़ती आबादी, फ्लैट कल्चर और पानी की बढ़ती खपत के कारण शहर धीरे-धीरे बड़े जल संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी मुद्दे पर झारखंड हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो रांची का हाल भी बेंगलुरु जैसा हो सकता है।
20 वार्ड पहले से झेल रहे भारी जल संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, रांची के 53 वार्डों में से करीब 20 वार्ड गर्मी के मौसम में गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड का पठारी इलाका होने के कारण यहां जमीन में पानी लंबे समय तक नहीं टिकता। ऐसे में Rain Water Harvesting यानी वर्षा जल संचयन ही सबसे बड़ा समाधान माना जा रहा है।
भूजल का तेजी से हो रहा दोहन
वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, शहर में पानी की खपत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। वॉशिंग मशीन, वॉटर फिल्टर और अन्य आधुनिक उपकरणों के उपयोग ने पानी की मांग बढ़ा दी है। इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है। लगातार ग्राउंड वाटर निकाले जाने से कई इलाके “हार्ड ज़ोन” की तरफ बढ़ रहे हैं।
पानी पर मीटर लगाने की उठी मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब मीटर आधारित व्यवस्था जरूरी हो गई है। दूसरे देशों की तरह झारखंड में भी पानी के उपयोग पर नियंत्रण के लिए मीटर लगाए जाने चाहिए। केवल टैंकर के सहारे समस्या का समाधान संभव नहीं माना जा रहा।
सरकार और नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती
Central Ground Water Board लगातार भूजल की मॉनिटरिंग कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड अभी “सेफ ज़ोन” में है, लेकिन शहरी और माइनिंग क्षेत्रों में Groundwater Stress तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और नगर निगम ने अभी ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में रांची को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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