Jharkhand Politics: बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (सदाकत आश्रम) में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की मौजूदगी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण बिल यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
Read More- Jharkhand News: रांची में JMM की बड़ी बैठक-सीएम हेमंत सोरेन ने दिया जीत का मंत्र
Jharkhand Politics: हक देने की नीयत नहीं, सिर्फ राजनीति
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 2023 में जिस तरह विशेष सत्र बुलाकर आनन-फानन में इस बिल को लाया गया, उससे स्पष्ट है कि केंद्र का उद्देश्य महिलाओं को तत्काल अधिकार देना नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक समीकरण साधना था। उन्होंने एक बड़ी विसंगति की ओर इशारा करते हुए कहा, “संसदीय इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि कोई अधिनियम अब तक नोटिफाई और लागू भी नहीं हुआ, और सरकार उसमें संशोधन लाने की कोशिश कर रही है।”
Jharkhand Politics: तत्काल प्रभाव से लागू हो आरक्षण
मंत्री ने याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने इस विधेयक का समर्थन किया था। उन्होंने मांग की कि इसे बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। दीपिका पांडेय ने कहा कि यदि सरकार ईमानदार है, तो लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें तुरंत महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं।
Read More- Big Breaking: रांची में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मारने वाला आरोपी गिरफ्तार
Jharkhand Politics: ओबीसी और जातिगत जनगणना का मुद्दा
केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें जोड़कर इस प्रक्रिया को लटकाया और अब संशोधन के जरिए ओबीसी (OBC) प्रतिनिधित्व के सवाल से बचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का उपयोग महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय भविष्य की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने और सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है।
Jharkhand Politics: कांग्रेस ही महिला आरक्षण की असली समर्थक है
अपने संबोधन में दीपिका पांडेय सिंह ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ही महिला आरक्षण की असली समर्थक है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन्हें सत्ता की मुख्यधारा से जोड़ा था। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि देश की महिलाएं अब खोखले आश्वासनों को स्वीकार नहीं करेंगी, उन्हें वास्तविक अधिकार और उचित प्रतिनिधित्व चाहिए।












