रांची झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। आज बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों और ‘झारखंड राज्य आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा’ के प्रतिनिधियों के बीच एक ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई। लगभग एक घंटे तक चली इस वार्ता में राज्य के 42,000 से अधिक आकलन-सफल सहायक अध्यापकों की नौकरी सुरक्षित रखने का भरोसा दिलाया गया एक ऐसा फैसला जो हजारों परिवारों की जिंदगी बदलने की क्षमता रखता है।
बैठक का विवरण कब, कहाँ और किनके बीच?
नगर विकास मंत्री श्री सुदीप सोनू जी के आधिकारिक आवास, रांची में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य सरकार और संघर्ष मोर्चा के बीच सीधी और सकारात्मक वार्ता हुई। सरकार की ओर से यह प्रतिबद्धता जताई गई कि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में किसी भी कर्मचारी के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
बैठक में सरकार की ओर से उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
| # | नाम | पद |
| 1 | श्री सुदीप सोनू | नगर विकास मंत्री, झारखंड सरकार |
| 2 | श्री उमाशंकर सिंह | शिक्षा सचिव, झारखंड सरकार |
| 3 | श्री सर्वेन्दु तिग्गा | प्रशासी पदाधिकारी, झारखंड सरकार |
संघर्ष मोर्चा के पाँच प्रतिनिधि जिन्होंने वार्ता में भाग लिया:
- ऋषिकांत तिवारी
- बबलू सिंह
- सुमन कुमार
- विकास चौधरी
- दिलशाद अहमद
बैठक के प्रमुख निर्णय जो बदल सकते हैं हजारों जिंदगियाँ
लगभग एक घंटे तक चली इस गहन वार्ता के बाद तीन बड़े और ठोस निर्णय सामने आए, जिनका सीधा असर राज्य के शिक्षा जगत पर पड़ेगा:
निर्णय 1 सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश तक धैर्य व संयम सरकार और मोर्चा दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय तक सभी पक्ष धैर्य बनाए रखेंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेंगे। किसी भी प्रकार का अतिरिक्त विवाद या आंदोलन इस समय उचित नहीं होगा।
निर्णय 2 42,000 आकलन-सफल सहायक अध्यापकों की नौकरी सुरक्षित सरकार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में राज्य के किसी भी कर्मचारी और आमजन के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 42,000 आकलन-सफल सहायक अध्यापकों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया गया।
निर्णय 3 अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को मिलेगी गति बैठक में यह भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा ताकि पात्र परिवारों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का संदेश ‘कर्मचारी हितों से नहीं होगा समझौता’
“मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में यह स्पष्ट है कि राज्य के किसी भी कर्मचारी एवं आमजन के हितों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
यह वक्तव्य महज एक राजनीतिक बयान नहीं है यह उन हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो महीनों से अनिश्चितता में जी रहे थे। सरकार और संगठन के बीच हुई इस बातचीत ने साफ संकेत दिया है कि झारखंड सरकार अपने शिक्षकों के साथ खड़ी है।
जमीनी ताकत सैकड़ों अध्यापक रहे साथ
बैठक स्थल पर केवल पाँच प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य से आए सैकड़ों सहायक अध्यापक एकजुटता के साथ उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सामूहिक संघर्ष है।
बैठक में मौजूद प्रमुख साथियों में बृज किशोर तिवारी, जितेंद्र सिंह, विनीत दुबे, बसंत कुमार, रवि यादव, मोतीलाल गिरी, अभय सिंह, कुमोद सिंह, राजू नयन, संजय पाठक, मुख्तार अंसारी सहित सैकड़ों की संख्या में सहायक अध्यापक उपस्थित थे। यह एकता ही इस संगठन की असली ताकत है।
पृष्ठभूमि क्या है पूरा मामला?
झारखंड राज्य में वर्षों से हजारों सहायक अध्यापक आकलन (Assessment) प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नौकरी की स्थायी सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है और अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है। इसी पृष्ठभूमि में ‘झारखंड राज्य आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा’ का गठन किया गया था।
आज की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार सरकार ने सर्वोच्च स्तर पर आकर इन शिक्षकों की बात सुनी और ठोस आश्वासन दिया। यह संवाद और विश्वास ही लोकतंत्र की असली जीत है।
क नज़र में मुख्य तथ्य
| दिनांक | 29 अप्रैल 2026, बुधवार |
| स्थान | मंत्री आवास, रांची, झारखंड |
| अध्यक्षता | नगर विकास मंत्री श्री सुदीप सोनू |
| अन्य शासकीय अधिकारी | शिक्षा सचिव, प्रशासी पदाधिकारी सहित |
| मोर्चा प्रतिनिधि | 5 प्रतिनिधि + सैकड़ों साथी |
| प्रभावित अध्यापक | 42,000+ आकलन-सफल सहायक अध्यापक |
| वार्ता की अवधि | लगभग 1 घंटा |
| परिणाम | अत्यंत सकारात्मक |
झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में आज का दिन एक सुनहरे पन्ने की तरह दर्ज होगा। जब हजारों शिक्षक निराश थे, तब सरकार ने उनके दरवाजे तक आकर यह संदेश दिया कि वे अकेले नहीं हैं। यह वार्ता न केवल 42,000 शिक्षकों की नौकरी की लड़ाई है, बल्कि झारखंड की शिक्षा प्रणाली के भविष्य की नींव भी है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।







