Ranchi: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में राजनीतिक हलचले तेज हो गई है। इसको लेकर झारखंड में भी सरगर्मी तेज हो गई है। पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि राज्य सरकार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल के पक्ष में प्रस्ताव पारित करना चाहिए और इसे केंद्र सरकार को भेजना चाहिए।
विशेष सत्र की मांग के पीछे क्या है बाबूलाल का तर्क?
रविवार को रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबूलाल मरांडी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक सदन का विशेष सत्र बुलाकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया था। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि विपक्ष के असहयोग के कारण यह बिल संसद में पारित नहीं हो सका।
मरांडी ने कहा-झारखंड की संस्कृति हमेशा से महिलाओं को सम्मान देने वाली रही है। मुख्यमंत्री खुद को महिला सशक्तिकरण का हिमायती बताते हैं, तो उन्हें अब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर अपनी मंशा साफ करनी चाहिए।
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सीटों का गणित: विधानसभा में 81 से बढ़कर 121 होंगी सीटें
बाबूलाल मरांडी ने इस बिल के पारित होने से झारखंड को होने वाले बड़े फायदों का जिक्र किया। उनके अनुसार, यदि यह अधिनियम प्रभावी होता है तो झारखंड का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।
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लोकसभा सीटें: वर्तमान में झारखंड में 14 लोकसभा सीटें हैं, जो बढ़कर 21 हो जाएंगी। इसमें से 7 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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विधानसभा सीटें: राज्य विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाएंगी। इसमें से 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि 2029 से ही प्रदेश की आधी आबादी को नेतृत्व का एक ऐतिहासिक अवसर मिल सकता है।
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फूलो-झानो की धरती पर इतिहास रचने की अपील
अपने पत्र में मरांडी ने झारखंडी गौरव और इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वीरांगना फूलो-झानो की इस वीर भूमि पर महिलाओं ने हमेशा सामाजिक और राजनैतिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
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बाबूलाल ने सीएम हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वे राज्यपाल की अनुमति लेकर जल्द से जल्द सत्र बुलाएं। उन्होंने कहा-यह कदम झारखंड की बहनों के लिए बहुप्रतीक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त करेगा। सीएम को दलगत भावना छोड़कर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता दिखानी चाहिए।








