Ranchi: जेएमएम ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बढ़ती महंगाई और राशन कार्ड रद्दीकरण के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा हमला बोला है। जेएमएम महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आर्थिक नीतियों के जरिए आम जनता को लगातार संकट में धकेल रही है।
उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार नहीं, बल्कि भाजपा की “चुनावी तेल नीति” तय करती है।
चुनाव के हिसाब से तय होते हैं तेल के दाम
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि वर्ष 2022 में जब कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब पांच राज्यों के चुनाव के दौरान 137 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए। वहीं जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत घटकर 75 से 80 डॉलर तक पहुंच गई, तब जनता को राहत नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले पेट्रोल-डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती यह साबित करती है कि भाजपा सरकार बाजार नहीं, बल्कि चुनाव को ध्यान में रखकर फैसले लेती है।
तेल कंपनियों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा
जेएमएम महासचिव ने सवाल उठाया कि जब इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग ₹81 हजार करोड़ का मुनाफा कमाया, तो फिर जनता पर “अंडर-रिकवरी” का बोझ क्यों डाला गया।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से अब तक केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के जरिए करीब ₹38.89 लाख करोड़ की वसूली कर चुकी है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है।
सोने की कीमत और महंगाई पर भी उठाए सवाल
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का असर सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब लोगों का अर्थव्यवस्था और करेंसी पर भरोसा कम होता है, तब वे सोने में निवेश करना शुरू करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण लोगों की बचत, रोजगार और क्रय शक्ति कमजोर हुई है। आज आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स के बोझ से परेशान है।
राशन कार्ड रद्दीकरण पर भी भाजपा पर हमला
जेएमएम नेता ने राशन कार्ड रद्द किए जाने के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी गरीबों को योजनाओं से वंचित करने की कोशिश हो रही है। भाजपा झारखंड में भी एसआईआर जैसे मुद्दों के जरिए गरीबों, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकार छीनने की साजिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा गरीबों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरतमंदों को राशन व सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।







