Ranchi: झारखंड में सामने आए बहुचर्चित ट्रेजरी महाघोटाले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के 14 जिलों के कोषागारों से करीब 130 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई है और यह मामला बिहार के चर्चित चारा घोटाले से भी बड़ा साबित हो सकता है।
कई बड़े अधिकारी और सफेदपोश घोटाले की जद में आ सकते हैं
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने 11 अप्रैल 2026 को भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर समय रहते इस मामले की गंभीर जांच नहीं हुई, तो कई बड़े अधिकारी और राजनीतिक चेहरे इसकी जद में आ सकते हैं।
मरांडी के अनुसार, यह घोटाला सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैला एक संगठित आर्थिक अपराध है। हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत 14 जिलों में अवैध निकासी के मामले सामने आए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के करोड़ों रुपये की निकासी असंभव
उन्होंने बोकारो ट्रेजरी मामले में गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडे को अकेला आरोपी मानने पर सवाल उठाए। मरांडी ने दावा किया कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के करोड़ों रुपये की निकासी संभव नहीं हो सकती। उन्होंने बोकारो में मृतक सिपाही के नाम पर 63 बार वेतन ट्रांसफर होने का भी जिक्र किया।
हजारीबाग मामले को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। मरांडी ने कहा कि वहां ट्रेजरी से अवैध निकासी की रकम 30 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों और उनके रिश्तेदारों के खातों का इस्तेमाल कर सरकारी पैसे की हेराफेरी की गई।
JAP-IT की भूमिका की जांच
पत्र में JAP-IT की भूमिका की जांच की भी मांग की गई है। मरांडी ने कहा कि ई-कुबेर सिस्टम में तकनीकी छेड़छाड़ के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग और पेयजल विभाग में भी करोड़ों की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने और सच सामने लाने के लिए पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी CBI से कराना बेहद जरूरी है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।








