Jharkhand: झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी एंबुलेंस सेवा को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य में कागजों पर तो सैकड़ों एंबुलेंस दौड़ रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में मरीजों को चारपाई या कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
हाल ही में हमने झारखंड के गिरिडीह की घटना देखी जहां जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। प्रसव पीड़ा से कराहती सुनीता सोरेन को उबड़-खाबड़ रास्तों से ग्रामीण किसी तरह मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे, तब जाकर इलाज संभव हो सका।
लगातार बढ़ते दबाव और अनियमितताओं के आरोपों के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने 25 मई को एंबुलेंस संचालन करने वाली संस्था ‘सम्मान फाउंडेशन’ का एग्रीमेंट रद्द कर दिया है।
करोड़ों की एंबुलेंस खरीद पर खड़े हुए बड़े सवाल
आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड सरकार ने एंबुलेंस सेवा को दुरुस्त करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया है:
- साल 2022: स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से 206 एंबुलेंस खरीदी थीं।
- फरवरी 2026: करीब 80 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से 237 नई एंबुलेंस खरीदने का टेंडर जारी किया गया।
पुराने और नए आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो राज्य में 500 से अधिक एंबुलेंस उपलब्ध होनी चाहिए। यानी औसतन हर जिले के हिस्से में 20 से ज्यादा एंबुलेंस आती हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये एंबुलेंस धरातल पर क्यों नजर नहीं आ रही हैं?
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Jharkhand: कागजों पर दौड़ती रहीं गाड़ियां, गायब मिले इंजन
इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई एंबुलेंस महीनों तक खराब हालत में यार्डों में खड़ी रहीं। यहां तक कि कुछ एंबुलेंस के इंजन तक गायब थे, लेकिन कागजों पर उन्हें चालू (Operational) दिखाकर लगातार सरकारी खजाने से बिल निकाले जाते रहे।
इस मामले में देश की सर्वोच्च ऑडिट संस्था कैग (CAG) ने भी तीखे सवाल उठाए हैं। CAG ने अपनी रिपोर्ट में आपत्ति जताई है कि आखिर एक बस बनाने वाली कंपनी को एंबुलेंस निर्माण का ठेका क्यों दिया गया?
भाजपा का स्वास्थ्य मंत्री पर तीखा हमला: “तुष्टिकरण और घोटाले का मॉडल”
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:
सम्मान फाउंडेशन पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप
अजय साह ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री ने तुष्टिकरण की राजनीति के तहत पूरे राज्य में एंबुलेंस संचालन का ठेका इरफान आलम की संस्था ‘सम्मान फाउंडेशन’ को सौंप दिया। ‘कौम’ को प्रदेश से ऊपर रखने का खामियाजा राज्य की गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का आर्थिक शोषण और हड़ताल
ठेका मिलने के बाद एंबुलेंस चालकों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ का आर्थिक शोषण किया गया। वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी बार-बार हड़ताल पर जाते रहे, जिससे आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।
जामताड़ा का फर्जी मोतियाबिंद ऑपरेशन मॉडल
भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह जामताड़ा में फर्जी मोतियाबिंद ऑपरेशन का घोटाला सामने आया था, ठीक उसी मॉडल पर झारखंड में एंबुलेंस का फर्जी संचालन कर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया गया है।
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जनता का सवाल: कहां हैं 500 एंबुलेंस?
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी समेत विपक्ष और झारखंड की जनता अब सरकार से सीधा सवाल पूछ रही है कि अगर बजट में कोई कमी नहीं थी, तो आज भी दूरदराज के इलाकों में जनता ‘दूरबीन लेकर एंबुलेंस खोजने’ को क्यों मजबूर है? क्यों प्रशासनिक विफलता के कारण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुंच गई है?
हालांकि, 25 मई को सम्मान फाउंडेशन का एग्रीमेंट रद्द होना इस बात का सबूत है कि विभाग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं था। अब देखना यह है कि क्या इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच होगी या मरीजों को यूं ही कंधों का सहारा लेना पड़ेगा।








