Rajya Sabha elections: झारखंड में खाली हुई दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार से नामांकन की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही राज्य की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्यसभा चुनाव लड़ने का संकेत दिया है और इसी को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है।
इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदीप प्रसाद दिल्ली रवाना हो चुके हैं। दिल्ली में आज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में उन राज्यों के राज्यसभा चुनावों पर चर्चा होनी है, जहां सीटें खाली हुई हैं। हालांकि, झारखंड की राजनीति में इस बैठक को विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है।
एक दर्जन नामों पर चल रही चर्चा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा के भीतर करीब एक दर्जन नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश, उद्योगपति परिमल नाथ वाणी, धनबाद के जाने माने नेता एल.बी. सिंह और पूर्व सांसद रविंद्र राय, वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय और वरिष्ठ नेता राकेश प्रसाद सहित कई अन्य चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। दिल्ली में होने वाली बैठक में उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ इसी राजनीतिक गणित पर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व यह विचार कर सकता है कि सीमित संख्या बल के बावजूद चुनावी मैदान में किस रणनीति के साथ उतरना है और जीत की संभावनाओं को कैसे मजबूत करना है।
पार्टी के लिए संख्या बल है सबसे बड़ी चुनौती
देखा जाए तो इस चुनाव भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संख्या बल की है। राज्यसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगियों की कुल संख्या लगभग 24 के आसपास है। ऐसे में केवल उम्मीदवार तय करना ही नहीं, बल्कि जीत का गणित भी पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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भाजपा के दो प्रवल दावेदार
जहां तक दावेदारों की बात है, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हाल के दिनों में उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव समेत राज्य में पार्टी के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है। संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी पकड़ भी मजबूत मानी जाती है।
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उद्योगपति परिमल नाथवाणी के नाम पर चर्चा
वहीं, उद्योगपति परिमल नाथवाणी का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं हैं कि भाजपा उन्हें एक स्वतंत्र समर्थित उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने पर विचार कर सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें कुछ अन्य विधायकों का समर्थन मिल सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी उनकी कई दौर की मुलाकातें और बातचीत होने की चर्चा है, जिसने उनके नाम को और अधिक चर्चाओं में ला दिया है।
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फिलहाल सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली भाजपा की बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक न केवल उम्मीदवारों के नाम तय कर सकती है, बल्कि झारखंड राज्यसभा चुनाव की पूरी राजनीतिक दिशा भी तय कर सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा किस चेहरे पर भरोसा जताती है और क्या वह अपने सीमित संख्या बल के बावजूद चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल हो पाती है या नहीं।








