Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अस्पताल में पिछले कई दिनों से एक्सरे फिल्म (X-ray Film) का स्टॉक पूरी तरह से खत्म हो गया है। आलम यह है कि रोजाना सैकड़ों मरीजों का एक्सरे तो किया जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट के नाम पर उन्हें डिजिटल या प्लास्टिक फिल्म देने के बजाय मोबाइल फोन से एक्सरे स्क्रीन की तस्वीर (फोटो) खींचने को कहा जा रहा है।
पैसे पूरे पर सुविधा अधूरी, हर दिन 500 मरीज परेशान
बताते चलेें कि रिम्स में हर दिन औसतन 400 से 500 मरीज एक्सरे जांच के लिए पहुंचते हैं, जिनमें ट्रॉमा, ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी और इमरजेंसी के गंभीर मरीज शामिल होते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिम्स प्रशासन एक्सरे जांच के नाम पर मरीजों से पूरा शुल्क वसूल रहा है (जिसमें फिल्म की लागत भी शामिल है), लेकिन बदले में मरीजों को फिल्म नहीं मिल रही। अब गंभीर मरीजों के हाथ में एक्सरे रिपोर्ट की जगह सिर्फ मोबाइल में मौजूद एक धुंधली तस्वीर रह गई है।
6 महीने से नहीं आया नया स्टॉक, डॉक्टर भी परेशान
अस्पताल के ही कर्मियों के मुताबिक, पिछली बार एक्सरे फिल्म की सप्लाई करीब 6 महीने पहले आई थी। अब वह स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है, लेकिन नया स्टॉक मंगाने की सरकारी प्रक्रिया कहां अटकी है, इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मुसीबत तब और बढ़ जाती है जब मोबाइल से खींची गई तस्वीर धुंधली होती है और डॉक्टर उसे देखकर सही डायग्नोसिस नहीं कर पाते। ऐसे में मरीजों को दोबारा एक्सरे कराने की नौबत आ रही है।
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स्मार्टफोन न होने पर क्या करें गरीब ग्रामीण?
रिम्स में झारखंड के दूर-दराज के गांवों से गरीब मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से कई मरीजों के पास स्मार्टफोन तक नहीं होता। ऐसे में वे दूसरों के मोबाइल का सहारा लेने को मजबूर हैं। यह स्थिति रिम्स प्रबंधन के दावों और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।
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