Ranchi: कभी “तालाबों का शहर” कहलाने वाली झारखंड की राजधानी रांची में अब तालाब एक-एक कर इतिहास बनते जा रहे हैं। कभी यहां 100 से अधिक तालाब हुआ करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या सिमटकर करीब 40 रह गई है। कई तालाब अतिक्रमण और निर्माण की भेंट चढ़ चुके हैं। अब शहर के बीचों-बीच स्थित हरमू जलाशय भी अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ता नजर आ रहा है। या यू कहे कि अस्तित्व की आखरी सांस गिन रहा है।
कचरे और गंदगी से पट चुका था हरमू जलाशय
देखा जाए तो कुछ समय पहले तक हरमू जलाशय कचरे और गंदगी से पट चुका था। लोगों को उम्मीद थी कि किसी दिन इसकी सफाई होगी, इसका सौंदर्यीकरण होगा और यह फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटेगा। लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल अलग है। जलाशय में मिट्टी डालकर उसे भरने का काम शुरू कर दिया गया है।
मौके पर पहुंचने पर वहां झारखंड आवास बोर्ड का बोर्ड लगा मिला और ट्रैक्टर की मदद से जलाशय में मिट्टी भराई का काम चलता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काम काफी दिनों से चल रहा हैं।
इस मामले में जब झारखंड आवास बोर्ड के सचिव सुनील कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह भूमि आवास बोर्ड की है। उनके अनुसार यह कोई प्राकृतिक तालाब नहीं, बल्कि खाली पड़ी जमीन थी, जहां वर्षों से बारिश का पानी जमा होने के कारण तालाब जैसा स्वरूप बन गया था।
विभाग किसी तालाब को खत्म करने की योजना पर काम नहीं कर रहा-सुनील कुमार
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग किसी तालाब को खत्म करने की योजना पर काम नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि आवास बोर्ड की जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कर चारदीवारी करने और उनका बेहतर उपयोग करने की योजना चल रही है। इसी के तहत इस भूखंड पर भी कार्य किया जा रहा है और भविष्य में यहां पार्क या अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
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देखा जाए तो रांची में लगातार खत्म होते तालाबों का असर रांची के भूजल स्तर, तापमान और जलवायु पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी अपनी ठंडी और सुहानी आबोहवा के लिए पहचाना जाने वाला रांची अब बढ़ती गर्मी और घटते जलस्रोतों की चुनौती से जूझ रहा है।
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सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि क्या हरमू जलाशय को बचाया जाना चाहिए, या फिर इसकी जगह पार्क और मार्केट कॉम्प्लेक्स का निर्माण होना चाहिए?
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