रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में मीडिया की एंट्री और फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी पर लगाई गई नई पाबंदियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिम्स प्रशासन का दावा है कि यह फैसला मरीजों की गोपनीयता और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है, लेकिन इसे लेकर बहस भी तेज हो गई है।
RIMS केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा केंद्र है। राज्य के विभिन्न जिलों से हर दिन हजारों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की होती है, जो बेहतर और सुलभ इलाज के लिए रिम्स पर निर्भर रहते हैं।
हालांकि अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। कभी दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी जांच और इलाज में देरी की शिकायत सामने आती है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों ने साफ-सफाई की बदहाल स्थिति, वार्डों में अव्यवस्था, बेड की कमी और जरूरी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया है। कई मामलों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने या निजी जांच केंद्रों का सहारा लेने की मजबूरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
ऐसे में मीडिया को अस्पताल की जमीनी हकीकत जनता तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता रहा है। रिम्स से जुड़ी समस्याएं, मरीजों की परेशानियां और स्वास्थ्य सेवाओं की खामियां अक्सर मीडिया रिपोर्टों के जरिए ही सामने आती रही हैं, जिसके बाद कई बार प्रशासन को सुधारात्मक कदम भी उठाने पड़े हैं।
इसी वजह से रिम्स प्रशासन के नए आदेश पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि अस्पताल में सब कुछ व्यवस्थित है तो मीडिया की आवाजाही और रिपोर्टिंग पर इतनी सख्ती की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष है कि मरीजों की निजता और अस्पताल की कार्यप्रणाली प्रभावित न हो, इसलिए अनुमति आधारित व्यवस्था लागू की गई है।
अब यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने का प्रयास साबित होता है या फिर पारदर्शिता को लेकर नई बहस को जन्म देता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।








