Ranchi: झारखंड में बढ़ती नशाखोरी को लेकर चिंता के बीच राजधानी रांची के डोरंडा स्थित शौर्य सभागार में दो दिवसीय विशेष जागरूकता सह मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में जागरूकता फैलाना है।
नशा सिर्फ व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को करता है प्रभावित
कार्यक्रम में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारी सैफ उमर ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके नुकसान के बारे में जागरूक करें। उन्होंने बताया कि नशीले पदार्थों का सेवन सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
तनाव और सामाजिक दबाव बना रहे युवाओं को शिकार
केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) के डॉ. संजय कुमार मुंडा ने कहा कि तनाव, करियर की चिंता, पारिवारिक समस्याएं और सामाजिक उपेक्षा युवाओं को नशे की ओर धकेल रही हैं। कई बार जिज्ञासा या शौक से शुरू हुई आदत बाद में गंभीर लत बन जाती है।
इलाज और काउंसलिंग से मिल सकती है नई जिंदगी
रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ. सजल अशीष नाग ने बताया कि नशे के शिकार लोगों के लिए रिनपास और CIP में 50-50 बेड की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है। समय पर इलाज और काउंसलिंग से व्यक्ति पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सकता है।
झारखंड में बढ़ रही चुनौती
विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि राज्य में तंबाकू, गांजा और ब्राउन शुगर जैसे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इस पर प्रभावी नियंत्रण और व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है।

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