Bokaro: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बोकारो के अग्रसेन भवन में युगांतर भारती, दामोदर बचाओ आंदोलन, देवनद दामोदर क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में देश के जाने-माने पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने शिरकत की और झारखंड सहित पूरे पूर्वी भारत में बढ़ते ‘थर्मल ट्रैप’ (ऊष्मा द्वीप) को लेकर बेहद डराने वाले आंकड़े साझा किए।
5 साल में कटे 1.5 लाख पेड़, झारखंड बना थर्मल ट्रैप
गोष्ठी के अति विशिष्ट अतिथि और युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने चौंकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि विकास की अंधी दौड़ में पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। राजमार्गों (NH) के विकास के नाम पर पेड़ काटने के मामले में झारखंड पूरे देश में 20वें स्थान पर है। पिछले 5 वर्षों में राज्य में लगभग डेढ़ लाख (1,50,000) पेड़ काटे गए हैं। अनियंत्रित खनन, कंक्रीट के जंगलों और सघन वनों की कटाई के कारण झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई शहर ‘थर्मल ट्रैप’ और हीट आइलैंड में बदल चुके हैं।
IIT प्रोफेसर की चेतावनी: 10% भूभाग को ‘वाटर बैंक’ बनाना जरूरी
भविष्य का भीषण जल संकट: मुख्य अतिथि आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. अंशुमाली ने चेताते हुए कहा कि यदि हमें पृथ्वी पर जीवन बचाए रखना है, तो कुल भूभाग का 10 प्रतिशत हिस्सा पानी के लिए आरक्षित करना ही होगा। यही 10% हिस्सा शेष 90% हिस्से के लिए ‘वाटर बैंक’ का काम करेगा। यदि हम ऐसा करने में विफल रहे, तो आने वाले समय में अनाज और पीने के पानी के लिए ऐसा हाहाकार मचेगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने गरगा, कोनार और दामोदर जैसी नदियों को बचाने के लिए उनकी सहायक प्राकृतिक जलधाराओं के संरक्षण पर जोर दिया।
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वसुधैव कुटुम्बकम से ही बचेगा पर्यावरण: जगन्नाथ शाही
विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगन्नाथ शाही ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को माता और नदियों-पर्वतों को पूजनीय माना गया है। हमें पश्चिमी देशों की अंधाधुंध दोहन वाली सोच को छोड़कर पुनः अपनी सनातन परंपराओं की ओर लौटना होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में सामाजिक भागीदारी को सबसे अहम बताया।
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इस गोष्ठी में सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा, श्रवण कुमार सिंह, शंकर प्रसाद स्वर्णकार सहित सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों ने हिस्सा लिया और अधिक से अधिक पेड़ लगाने व जल स्रोतों को प्रदूषित न करने का संकल्प लिया।

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