Dhanbad: शादी को यादगार बनाने के लिए लोग अलग-अलग जगहों का चुनाव करते हैं, लेकिन धनबाद में एक प्रेमी जोड़े का अनोखा फैसला चर्चा का विषय बन गया। कोर्ट मैरिज कर चुके दूल्हा-दुल्हन सनातन रीति-रिवाज से विवाह की रस्में पूरी करने के लिए सीधे मंडल कारा (जेल) परिसर स्थित शिव मंदिर पहुंच गए। हालांकि उनकी यह योजना पूरी नहीं हो सकी और उन्हें बिना फेरे लिए ही वापस लौटना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, बिहार के आरा निवासी दिलीप यादव और Dhanbad के पाथरडीह की रहने वाली कंचन पहले ही कोर्ट मैरिज कर चुके थे। इसके बाद दोनों परिवारों की इच्छा थी कि पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार भी विवाह संपन्न कराया जाए। इसी उद्देश्य से दोनों पक्षों के परिजन धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर पहुंचे और शादी की तैयारियां शुरू कर दीं।
फूल-माला, रिश्तेदार और विवाह की अन्य तैयारियां चल ही रही थीं कि इसकी सूचना जेल प्रशासन को मिल गई। सूचना मिलते ही जेलर दिनेश कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए विवाह की रस्में रोक दीं।
जेल प्रशासन का कहना था कि जेल परिसर के भीतर किसी भी तरह का आयोजन बिना पूर्व अनुमति के नहीं किया जा सकता। ऐसे में शादी की अनुमति देना संभव नहीं था।
इसके बाद दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों ने किसी दूसरे मंदिर में विवाह की रस्में पूरी करने का निर्णय लिया और वहां से वापस लौट गए।
यह अनोखा मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि शादी के लिए जेल परिसर स्थित मंदिर का चयन किया गया, लेकिन अनुमति नहीं होने के कारण सपनों की यह रस्म ऐन वक्त पर अधूरी रह गई।








