Ranchi: झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा पर बड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की हालिया राजनीतिक गतिविधियों ने उन्हें गहरी पीड़ा पहुंचाई है और पार्टी को अपने समर्पित नेताओं के योगदान का सम्मान करना चाहिए।
भाजपा की हालिया राजनीतिक गतिविधियों ने मुझे गहरी पीड़ा पहुंचाई है
उन्होंने बीजेपी पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि भाजपा की हालिया राजनीतिक गतिविधियों ने मुझे गहरी पीड़ा पहुंचाई है। मैं कांग्रेस पार्टी से आता हूँ, हमारी राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन मैंने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर झारखंड और यहां के स्थानीय नेताओं का सम्मान किया है। जब भी किसी स्थानीय व्यक्ति, कार्यकर्ता या नेता के सम्मान की बात आई है, मैंने खुलकर अपनी बात रखी है।
उन्होंने दीपक प्रकाश को राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद रहे दीपक प्रकाश का हृदय से सम्मान करता हूँ। झारखंड में भाजपा को खड़ा करने, संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने और पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा के लिए समर्पित कर दिया।
क्या दीपक प्रकाश को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा जा सकता था?
ऐसे में जब उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, तो मेरा भाजपा के नेताओं से सीधा सवाल है कि क्या दीपक प्रकाश को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा जा सकता था? यदि पार्टी के पास कोई सर्वमान्य उम्मीदवार नहीं था, तो एक समर्पित, अनुभवी और संघर्षशील नेता पर ही भरोसा जताया जा सकता था। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी जीत सुनिश्चित होती।
आज कुछ भाजपा नेता जिस उत्साह ढोल नगाड़े के साथ बाहरी उद्योगपति उम्मीदवार के स्वागत में लगे हुए हैं, उसे देखकर मन व्यथित होता है। क्या वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान इसी तरह भुला दिया जाएगा? राजनीति केवल धनबल से नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष और समर्पण से चलती है।
अपने ही नेताओं के योगदान का सम्मान करना सीखिए-इरफान अंसारी
उन्होने कहा मैं भाजपा के नेताओं से कहना चाहता हूँ कि अपने ही नेताओं के योगदान का सम्मान करना सीखिए। जो व्यक्ति पूरी जिंदगी पार्टी के लिए खड़ा रहा, कठिन परिस्थितियों में संगठन को संभाला, उसका सम्मान सबसे पहले होना चाहिए।
मेरी बातें कुछ नेता या नेत्री को बुरी लग सकती हैं, लेकिन मैं हमेशा सच बोलता हूँ और झारखंड के स्वाभिमान तथा स्थानीय नेतृत्व के सम्मान की आवाज उठाता रहूँगा। मैं कांग्रेस में हूँ, फिर भी जहां किसी स्थानीय नेता के सम्मान की बात होगी, वहां मैं बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उसके पक्ष में खड़ा रहूँगा।
झारखंड की राजनीति में त्याग, संघर्ष और समर्पण का सम्मान होना चाहिए। यही लोकतंत्र की असली ताकत है और यही झारखंड की पहचान भी है।

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