गुरूवार, अक्टूबर 29, 2026
Khabar Mantra
No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी
  • हमारे बारे में
Khabar Mantra
Advertise With Khabar Mantra - Reach Engage Grow Advertise With Khabar Mantra - Reach Engage Grow Advertise With Khabar Mantra - Reach Engage Grow

कारगिल विजय दिवस: बर्फ की चोटियों पर लिखी गई बहादुरी की अमर गाथा – कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई इतिहास हिंदी में

अगस्त 21, 2026
in देश National News
A A
भारतीय सेना का जवान बर्फीली पहाड़ी चोटी पर तिरंगा फहराते हुए, सूर्योदय की पृष्ठभूमि, गंभीर और गौरवपूर्ण भाव, यथार्थवादी शैली

कारगिल युद्ध 1999 - भारतीय सैनिकों की वीरता की अमर गाथा

Share on FacebookShare on Twitter
WhatsApp चैनल से जुड़ें ताजा समाचार सीधे WhatsApp पर पाएं
जॉइन करें
Google News पर खबर मन्त्र को फॉलो करेंझारखंड की हर ब्रेकिंग खबर के लिए स्टार दबाएं
फॉलो करें
यह खबर सुनेंऑडियो
समय: ~23 मिनट•हिंदी बुलेटिन
WhatsApp चैनल से जुड़ें
खबर मंत्र चुने
समुद्र तल से लगभग 18 हज़ार फीट ऊपर, जहां सांस लेना भी किसी संघर्ष से कम नहीं, वहां कुछ जवानों ने अपने कंधों पर बंदूक और दिल में सिर्फ एक ही जज़्बा लेकर चढ़ाई की थी-मां भारती की धरती को दुश्मन से वापस छीन लाने का जज़्बा। यह कहानी है साल 1999 की, जब कारगिल की बर्फीली चोटियों ने भारतीय सैनिकों के हौसले की ऐसी परीक्षा ली, जिसे आज पच्चीस साल से ज़्यादा वक़्त गुज़र जाने के बाद भी हर भारतीय गर्व से याद करता है। हर साल 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की कुर्बानी का प्रतीक है जिन्होंने अपने बेटे, पति और भाई देश की सरहद पर खो दिए।

कारगिल युद्ध क्या था?

कारगिल युद्ध, भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 के दौरान जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में लड़ा गया एक सशस्त्र संघर्ष था। यह युद्ध तब शुरू हुआ जब पाकिस्तानी सेना के नियमित सैनिकों और हथियारबंद घुसपैठियों ने सर्दियों के मौसम का फायदा उठाते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पार करके भारतीय क्षेत्र की ऊंची चोटियों पर कब्ज़ा जमा लिया। यह इलाका द्रास, कारगिल, बटालिक और मुश्कोह घाटी तक फैला हुआ था। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में गिना जाने वाला यह संघर्ष अपनी भौगोलिक कठिनाइयों की वजह से सैन्य इतिहास में एक अलग ही अध्याय बन गया।

युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?

मई 1999 में जब बर्फ पिघलनी शुरू हुई, तो कारगिल के इलाके में मवेशी चराने गए स्थानीय चरवाहों ने पहाड़ों की चोटियों पर संदिग्ध गतिविधियां देखीं और इसकी सूचना भारतीय सेना को दी। शुरुआत में इसे सामान्य घुसपैठ समझा गया, जिसे कुछ ही दिनों में खदेड़ने का दावा किया गया। लेकिन जैसे-जैसे सेना ने इलाके की गहराई से टोह ली, यह साफ हो गया कि यह कोई छोटी-मोटी घुसपैठ नहीं बल्कि एक सुनियोजित सैन्य अभियान था। पाकिस्तान की रणनीति श्रीनगर-लेह राजमार्ग (NH1D) को काटकर लद्दाख को शेष भारत से अलग-थलग करने की थी, ताकि सियाचिन क्षेत्र पर दबाव बनाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को फिर से हवा दी जा सके।

ऑपरेशन विजय

जब भारतीय सेना को घुसपैठ की गंभीरता का एहसास हुआ, तो भारत सरकार ने “ऑपरेशन विजय” के नाम से एक बड़े पैमाने के सैन्य अभियान की शुरुआत की। इस अभियान में दो लाख से ज़्यादा सैनिकों को कारगिल क्षेत्र में तैनात किया गया। भारतीय सेना के लिए यह लड़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि दुश्मन ऊंची चोटियों पर पहले से मोर्चा जमाए बैठा था, जबकि भारतीय जवानों को नीचे से ऊपर की ओर चढ़ाई करते हुए हमला बोलना था-वह भी बर्फीली हवाओं, पतली ऑक्सीजन और दुश्मन की सीधी गोलीबारी के बीच।

युद्ध की टाइमलाइन

  • मई 1999: स्थानीय चरवाहों की सूचना के बाद घुसपैठ का पता चला
  • 26 मई 1999: भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई कार्रवाई शुरू की
  • 13 जून 1999: भारतीय सेना ने तोलोलिंग चोटी पर दोबारा कब्ज़ा किया
  • 4 जुलाई 1999: टाइगर हिल पर भारतीय सेना की जीत
  • 7 जुलाई 1999: बटालिक सेक्टर में खालुबार रिज पर कब्ज़ा
  • 26 जुलाई 1999: युद्ध की आधिकारिक समाप्ति और भारत की विजय की घोषणा

प्रमुख लड़ाइयाँ

तोलोलिंग की लड़ाई

तोलोलिंग चोटी की लड़ाई कारगिल युद्ध की सबसे निर्णायक लड़ाइयों में से एक मानी जाती है। यह चोटी सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि यहां से श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर सीधी नज़र रखी जा सकती थी। भारतीय सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने भीषण संघर्ष के बाद इस चोटी को दुश्मन के कब्ज़े से मुक्त कराया।

टाइगर हिल की लड़ाई

टाइगर हिल की लड़ाई को कारगिल युद्ध की सबसे प्रतीकात्मक जीत माना जाता है। यह चोटी इतनी दुर्गम थी कि यहां चढ़ाई करना ही अपने आप में एक असंभव कार्य लगता था। भारतीय सेना ने रात के अंधेरे में चढ़ाई करके दुश्मन को चौंका दिया और भीषण लड़ाई के बाद इस चोटी पर तिरंगा फहराया।

पॉइंट 4875 (चोटी 5140)

यह वही चोटी है जहां कैप्टन विक्रम बत्रा और उनकी टीम ने असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया। इस चोटी पर कब्ज़ा करना युद्ध के मोड़ को भारत के पक्ष में करने वाला एक अहम कदम साबित हुआ।

बटालिक और मुश्कोह सेक्टर

बटालिक सेक्टर में लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय के नेतृत्व में खालुबार रिज पर कब्ज़ा किया गया, जबकि मुश्कोह घाटी में भी भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण चौकियों को दुश्मन से वापस छीना।

वीर सैनिकों की कहानियाँ

कैप्टन विक्रम बत्रा – “द्रास का शेर”

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में जन्मे कैप्टन विक्रम बत्रा 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स से थे। उन्होंने चोटी 5140 (टोलोलिंग नाले के ऊपर) को दोबारा भारत के कब्ज़े में लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युद्ध से पहले उन्होंने अपने साथियों से कहा था कि वे या तो तिरंगा फहराकर लौटेंगे या तिरंगे में लिपटकर वापस आएंगे। पॉइंट 4875 पर लड़ते हुए, अपने एक साथी की जान बचाते हुए, महज़ 24 वर्ष की आयु में वे शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय

1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय ने बटालिक सेक्टर के खालुबार रिज पर असाधारण नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने आखिरी सांस तक दुश्मन के बंकरों पर हमला जारी रखा। उन्हें भी मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया।

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव

18 ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने टाइगर हिल पर हमले के दौरान अद्भुत साहस दिखाया। एक खड़ी चट्टान पर सबसे पहले चढ़कर उन्होंने अपने साथियों के लिए रस्सी बांधी, ताकि बाकी प्लाटून ऊपर आ सके। इस दौरान कई गोलियां लगने के बावजूद वे लड़ते रहे। उनकी वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

राइफलमैन संजय कुमार

13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन संजय कुमार ने भी पॉइंट 4875 क्षेत्र में असाधारण बहादुरी दिखाते हुए दुश्मन के कई बंकरों को नष्ट किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और उन्हें भी परमवीर चक्र से नवाज़ा गया।

परम वीर चक्र विजेता

कारगिल युद्ध के दौरान भारत के चार वीर सैनिकों को देश के सर्वोच्च युद्ध वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया:
  1. कैप्टन विक्रम बत्रा (मरणोपरांत) – 13 जेएके राइफल्स
  2. लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय (मरणोपरांत) – 1/11 गोरखा राइफल्स
  3. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव – 18 ग्रेनेडियर्स
  4. राइफलमैन संजय कुमार – 13 जेएके राइफल्स
इसके अलावा नौ सैनिकों को महावीर चक्र, 55 सैनिकों को वीर चक्र और सैकड़ों अन्य जवानों को विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

शहीदों के प्रेरणादायक प्रसंग

कारगिल युद्ध में लगभग 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 1300 से अधिक जवान घायल हुए। हर शहीद की अपनी एक कहानी है-कोई अपनी शादी की सालगिरह से पहले घर लौटने का वादा करके गया था, तो कोई अपने नवजात बच्चे को देखे बिना ही शहीद हो गया। इन सैनिकों के पत्र, जो उन्होंने अपने परिवारों को युद्ध के मोर्चे से लिखे थे, आज भी पढ़ने वालों की आंखें नम कर देते हैं। यही वे कहानियां हैं जो कारगिल विजय दिवस को सिर्फ एक ऐतिहासिक तारीख से कहीं ज़्यादा भावनात्मक बना देती हैं।

भारतीय सेना की रणनीति

भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि दुश्मन पहले से ऊंची चोटियों पर मोर्चा जमाए बैठा था। ऐसे में सेना ने रात के अंधेरे में चढ़ाई करने, तोपखाने से लगातार गोलाबारी करने और छोटी टुकड़ियों में आगे बढ़कर दुश्मन के बंकरों को एक-एक करके नष्ट करने की रणनीति अपनाई। बोफोर्स तोपों ने इस युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई, जिन्होंने ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए।

भारतीय वायुसेना की भूमिका

भारतीय वायुसेना ने “ऑपरेशन सफेद सागर” के तहत 26 मई 1999 से हवाई कार्रवाई शुरू की। मिग लड़ाकू विमानों ने ऊंचाई पर स्थित दुश्मन के बंकरों और आपूर्ति मार्गों पर सटीक हमले किए। यह पहला मौका था जब भारतीय वायुसेना ने इतनी ऊंचाई पर और इतने सीमित दायरे में हवाई हमलों को अंजाम दिया, जिसने युद्ध के परिणाम को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई।

पाकिस्तान की योजना कैसे विफल हुई

पाकिस्तान की योजना नियंत्रण रेखा को अस्थिर करके अंतरराष्ट्रीय ध्यान कश्मीर मुद्दे पर केंद्रित कराना और सियाचिन क्षेत्र पर सामरिक बढ़त हासिल करना था। हालांकि, भारतीय सेना की तेज़ प्रतिक्रिया, कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की मज़बूत स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के चलते पाकिस्तान की यह रणनीति पूरी तरह विफल हो गई। पाकिस्तान को अपनी सेना की सीधी संलिप्तता से इनकार करना पड़ा, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय साख को भी गहरा धक्का लगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कारगिल युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत के रुख का समर्थन किया। अमेरिका सहित कई प्रमुख देशों ने पाकिस्तान पर नियंत्रण रेखा से अपनी सेना हटाने का दबाव बनाया। जुलाई 1999 में अमेरिकी राष्ट्रपति और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बीच हुई बातचीत के बाद पाकिस्तान को अपने सैनिकों की वापसी पर सहमत होना पड़ा, जिसने युद्ध की समाप्ति की दिशा तय की।

भारत को मिली सीख

कारगिल युद्ध ने भारत को कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक सबक दिए। इस युद्ध के बाद खुफिया तंत्र को मज़बूत करने, सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने और तीनों सेनाओं-थल सेना, वायुसेना और नौसेना-के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसी के परिणामस्वरूप बाद में कारगिल समीक्षा समिति का गठन हुआ, जिसकी सिफारिशों पर भारत की रक्षा नीति में कई अहम बदलाव किए गए।

आज कारगिल विजय दिवस कैसे मनाया जाता है

हर साल 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इस दिन लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिसमें सेना के वरिष्ठ अधिकारी, शहीदों के परिजन और आम नागरिक शामिल होते हैं। देशभर के स्कूलों, सैन्य छावनियों और सार्वजनिक स्थलों पर भी शहीदों को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

द्रास वॉर मेमोरियल

द्रास में स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल उन सभी वीर सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी। इस स्मारक की दीवारों पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित हैं, और यहां हर साल हज़ारों लोग श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं। इसके अतिरिक्त, 2019 में दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया गया, जो कारगिल सहित भारत के सभी प्रमुख युद्धों के शहीदों को समर्पित है।

कम ज्ञात तथ्य (Did You Know?)

  • कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहां लड़ाई 16,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर लड़ी गई।
  • इस युद्ध में भारतीय वायुसेना ने पहली बार इतनी ऊंचाई और सीमित दायरे में हवाई हमलों को अंजाम दिया।
  • कैप्टन विक्रम बत्रा का रेडियो कोड नेम “शेरशाह” था।
  • युद्ध लगभग दो महीने तक चला और स्थानीय चरवाहों की सतर्कता ने घुसपैठ को समय रहते उजागर करने में अहम भूमिका निभाई।
  • बोफोर्स तोपों ने इस युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई, जिनकी मारक क्षमता ने ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया।

FAQs

  1. कारगिल विजय दिवस कब मनाया जाता है? कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है।
  2. कारगिल युद्ध कब हुआ था? कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के दौरान लड़ा गया था।
  3. ऑपरेशन विजय क्या था? ऑपरेशन विजय कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठ के खिलाफ भारतीय सेना की सैन्य कार्रवाई का कोड नाम था।
  4. कारगिल युद्ध में कितने भारतीय सैनिक शहीद हुए थे? इस युद्ध में लगभग 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 1300 से अधिक घायल हुए।
  5. कारगिल युद्ध में कितने परमवीर चक्र दिए गए? इस युद्ध में चार सैनिकों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
  6. टाइगर हिल की लड़ाई क्यों महत्वपूर्ण थी? टाइगर हिल की लड़ाई युद्ध की सबसे प्रतीकात्मक जीत मानी जाती है, क्योंकि यह चोटी अत्यंत दुर्गम थी और इस पर कब्ज़ा भारतीय सेना के हौसले का प्रतीक बन गया।
  7. कैप्टन विक्रम बत्रा कौन थे? कैप्टन विक्रम बत्रा 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के अधिकारी थे, जिन्होंने पॉइंट 4875 पर लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की और उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला।
  8. भारतीय वायुसेना ने कारगिल युद्ध में क्या भूमिका निभाई? भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत दुश्मन के बंकरों और आपूर्ति मार्गों पर हवाई हमले किए।
  9. द्रास वॉर मेमोरियल कहां स्थित है? द्रास वॉर मेमोरियल लद्दाख के द्रास कस्बे में स्थित है।
  10. कारगिल युद्ध का मुख्य कारण क्या था? पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने सर्दियों में खाली पड़ी भारतीय चौकियों पर कब्ज़ा करके श्रीनगर-लेह राजमार्ग को काटने और लद्दाख को अलग-थलग करने की कोशिश की थी।
  11. कारगिल युद्ध कितने दिनों तक चला? यह युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला।
यह भी पढ़ें संबंधित ताज़ा ख़बरें
  • Share Market Today: 6 दिनों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में ब्रेक, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा
    Share Market Today: 6 दिनों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में ब्रेक, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा
  • डाक विभाग में इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन का बड़ा मौका, इस दिन आयोजित होगी परीक्षा
    डाक विभाग में इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन का बड़ा मौका, इस दिन आयोजित होगी परीक्षा
  • NTA की परीक्षा व्यवस्था अब होगी और भी सख्त, जांच के लिए बनेगी चार स्तरीय सिस्टम
    NTA की परीक्षा व्यवस्था अब होगी और भी सख्त, जांच के लिए बनेगी चार स्तरीय सिस्टम
  • Share Market Today: शेयर बाजार लाल निशान में, सेंसेक्स-निफ्टी फिसले; IPO भी खुला
    Share Market Today: शेयर बाजार लाल निशान में, सेंसेक्स-निफ्टी फिसले; IPO भी खुला
Akash Kumar Singh Tech - Khabar Mantra
Akash Singh

Akash Kumar Singh is an IT Executive & SEO Specialist at Khabar Mantra. A Full-Stack Developer, AI/ML Engineer, and EdTech Founder (Dilwado), he scales platforms serving 10K+ students, commands a 400K+ subscriber tech channel, and drives high-performance web growth.

Table of Contents

Toggle
  • कारगिल युद्ध क्या था?
  • युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?
  • ऑपरेशन विजय
  • युद्ध की टाइमलाइन
  • प्रमुख लड़ाइयाँ
    • तोलोलिंग की लड़ाई
    • टाइगर हिल की लड़ाई
    • पॉइंट 4875 (चोटी 5140)
    • बटालिक और मुश्कोह सेक्टर
  • वीर सैनिकों की कहानियाँ
    • कैप्टन विक्रम बत्रा – “द्रास का शेर”
    • लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय
    • ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव
    • राइफलमैन संजय कुमार
  • परम वीर चक्र विजेता
  • शहीदों के प्रेरणादायक प्रसंग
  • भारतीय सेना की रणनीति
  • भारतीय वायुसेना की भूमिका
  • पाकिस्तान की योजना कैसे विफल हुई
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
  • भारत को मिली सीख
  • आज कारगिल विजय दिवस कैसे मनाया जाता है
  • द्रास वॉर मेमोरियल
  • कम ज्ञात तथ्य (Did You Know?)
  • FAQs
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
Special Report
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive
📌 यह भी पढ़ें:
  • सेंसेक्स 1000 अंक गिरा, निफ्टी 250 अंक टूटा; जानें शेयर बाजार में गिरावट की वजह
  • Cyclone Arnab: चक्रवाती तूफान का नाम 'Arnab' ही क्यों रखा गया? जानिए कौन तय करता है तूफानों के नाम और क्या हैं नियम
  • शेयर बाजार में गिरावट से निवेशक परेशान! सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर, IT और एनर्जी शेयरों में बिकवाली
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
Top Updates
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट
Exclusive Report
खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट

Related Posts

सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट और निफ्टी 250 अंक टूटा, शेयर बाजार में बिकवाली का माहौल
देश National News

सेंसेक्स 1000 अंक गिरा, निफ्टी 250 अंक टूटा; जानें शेयर बाजार में गिरावट की वजह

अक्टूबर 28, 2026
Why was the cyclonic storm named 'Arnab'? Find out who decides the names of storms and what the rules are.
खबर हटके

Cyclone Arnab: चक्रवाती तूफान का नाम ‘Arnab’ ही क्यों रखा गया? जानिए कौन तय करता है तूफानों के नाम और क्या हैं नियम

अक्टूबर 27, 2026
27 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 50 अंक फिसला
देश National News

शेयर बाजार में गिरावट से निवेशक परेशान! सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर, IT और एनर्जी शेयरों में बिकवाली

अक्टूबर 27, 2026
Next Post
Ranchi से अपहृत युवक को कुजू में पुलिस ने सकुशल छुड़ाया, पांच आरोपी गिरफ्तार

Ranchi से अगवा कर युवक को लेकर भाग रहे थे आरोपी, बोलेरो समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

Ramgarh News: भदानीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसडीपीओ राघवेंद्र शर्मा, 40 पुड़िया ब्राउन शुगर और तीन गिरफ्तार तस्करों की जानकारी देते हुए

Ramgarh में नशे के नेटवर्क पर बड़ा वार! बिना नंबर प्लेट बाइक से हो रही थी ड्रग्स सप्लाई

Order to frame charges against Lalu Yadav challenged; High Court seeks response from ED

लालू यादव के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती, हाईकोर्ट ने ED से मांगा जवाब

अक्टूबर 29, 2026

लोहरदगा में कुड़ू-चंदवा रोड पर भीषण हादसा, ऑटो चालक समेत दो की मौत

जमीन के अंदर गड़े थे नोटों के 3 ड्रम…मुखबिर की एक खबर और खुल गया राज़

कतरास के तेलियाबांध में मुन्ना पंडित की हत्या, घर में मिला लहूलुहान शव

लातेहार में CISF की बड़ी कार्रवाई, 35 टन कोयले से लदा हाइवा जब्त; एक महीने में 800 टन तक कोयला बरामद

Breaking News: रांची में नाबालिग के अपहरण मामले में युवक गिरफ्तार, दो दिन पहले परिजनों ने दर्ज कराई थी FIR

Khabar Mantra

© 2025 Khabar Mantra

Navigate Site

  • Home
  • Privacy Policy
  • हमारे बारे में (About Us)
  • Corrections Policy
  • दृष्टिकोण एवं विजन (Vision & Mission)
  • Editorial Policy
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • संपर्क सूत्र (Contact Us) | खबर मन्त्र
  • Sitemap

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
व्हाट्सएप शेयर ग्रुप से जुड़ें
✕
अगला लेख
✕

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी
  • हमारे बारे में

© 2025 Khabar Mantra

📍

अपना शहर / जिला चुनें

झारखंड व बिहार के प्रमुख जिलों की ताजा खबरें

🌟 रांची (Ranchi) राजधानी 🌟 धनबाद (Dhanbad) कोयलांचल 🌟 जमशेदपुर (Tata) इस्पात नगरी बोकारो (Bokaro) पलामू (Palamu) हजारीबाग (Hazaribagh) गिरिडीह (Giridih) देवघर (Deoghar) कोडरमा (Koderma) दुमका (Dumka) रामगढ़ (Ramgarh) गढ़वा (Garhwa) गुमला (Gumla) चाईबासा (Chaibasa) चतरा (Chatra) लोहरदगा (Lohardaga) सिमडेगा (Simdega) जामताड़ा (Jamtara) खूंटी (Khunti) लातेहार (Latehar) साहिबगंज (Sahibganj) पाकुड़ (Pakur) गोड्डा (Godda) सरायकेला (Seraikela) 🚩 बिहार (Bihar News) 🏹 पूरा झारखंड (All)
होम आप का शहर K जॉब्स Shorts