CGL जांच को लेकर CID पर गंभीर आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि CGL परीक्षा मामले में कई प्रश्न पुराने प्रश्नपत्रों से हूबहू मिलते थे और कुछ चयनित अभ्यर्थियों को पहले से इन सवालों की तैयारी कराई गई थी। उनका दावा है कि CID ने जांच के दौरान इन पहलुओं पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की और मामले का फोकस नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों की ओर मोड़ दिया। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्यों को छिपाया गया और अदालतों के समक्ष भी मामले की सही तस्वीर पेश नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों पर CID या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस पोस्ट के संदर्भ में कोई पक्ष सामने नहीं आया है।ADG मनोज कौशिक पर भी लगाए गंभीर आरोप
मरांडी ने अपने बयान में CID के ADG मनोज कौशिक की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में CID सरकार के दबाव में काम कर रही है और महत्वपूर्ण मामलों में वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय जांच को दूसरी दिशा में ले जाया जा रहा है। उन्होंने मनोज कौशिक के पुराने कार्यकाल को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि हजारीबाग में SP रहते हुए उन पर कोयला चोरी और अवैध उगाही से जुड़े आरोप लगे थे। मरांडी ने यह भी कहा कि बाद में भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच ACB स्तर पर हुई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है। ऐसे में संबंधित जांच रिपोर्ट, आधिकारिक दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।JPSC चेयरमैन से पूछताछ पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने JPSC परीक्षा मामले में आयोग के चेयरमैन से कथित तौर पर कई बार पूछताछ किए जाने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि CID जांच का पूरा फोकस परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी पर केंद्रित करने की कोशिश कर रही है, जबकि कथित घोटाले के बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंच रही है। मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों के खिलाफ पुराने परीक्षा मामलों में कथित गड़बड़ियों की अलग से जांच और FIR क्यों नहीं की गई।CID पर जांच की जानकारी लीक करने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने CID की जांच प्रक्रिया को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच से जुड़ी जानकारियां लगातार मीडिया में लीक की जा रही हैं। उनके अनुसार, इससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है और जांच की वास्तविक दिशा से ध्यान हटता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल एक विशेष नैरेटिव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है।CBI जांच की मांग
JPSC और JSSC-CGL परीक्षा विवाद को लेकर बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर राज्य सरकार से CBI जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी जांच एजेंसी और पूरी प्रक्रिया पर भरोसा है, तो उसे मामले की निष्पक्षता साबित करने के लिए जांच CBI को सौंपने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर हेरफेर से जुड़ा मामला है। उनके मुताबिक, युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है।दूसरे एक्स पोस्ट में पुलिस व्यवस्था पर साधा निशाना
अपने दूसरे पोस्ट में बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की पुलिस व्यवस्था और ADG मनोज कौशिक की भूमिका को लेकर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में पुलिस व्यवस्था का वास्तविक नियंत्रण DGP के बजाय मनोज कौशिक के पास है। मरांडी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग के SP रहते हुए मनोज कौशिक पर कोयला चोरी से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे। उन्होंने तत्कालीन IG मुरारीलाल मीणा द्वारा कथित तौर पर मामले को उजागर किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगे दावा किया कि ACB में भी मनोज कौशिक के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच हुई थी और जांच के बाद राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था।सरकार पर लगाए ‘दागी अधिकारियों’ को संरक्षण देने के आरोप
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में ऐसे अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है, जिनके खिलाफ पहले से विवाद या शिकायतें रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार पर भी पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल हैं और सरकार इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।सरकार और CID के जवाब का इंतजार
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पहले से ही झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। छात्र संगठन लगातार परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बाबूलाल मरांडी के ताजा आरोपों ने इस राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर राज्य सरकार, CID और ADG मनोज कौशिक का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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